यमन युद्ध में भाड़े पर लड़ने वाले एक लड़ाके की कहानी
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फ़ुआद (बदला हुआ नाम) यमन के पोर्ट सिटी हुदैदा में मोटरसाइकल कोरियर के रूप में काम करके अपनी पत्नी और चार बच्चों का पेट भर रहा था, लेकिन मार्च में अचानक युद्धक विमानों की घन गरज और गोलियों की गड़गड़ाहट ने उनके जीवन का चैन और सुकून छीन लिया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २५, २०१८ १५:०६ Asia/Kolkata
  • यमन युद्ध में भाड़े पर लड़ने वाले एक लड़ाके की कहानी

फ़ुआद (बदला हुआ नाम) यमन के पोर्ट सिटी हुदैदा में मोटरसाइकल कोरियर के रूप में काम करके अपनी पत्नी और चार बच्चों का पेट भर रहा था, लेकिन मार्च में अचानक युद्धक विमानों की घन गरज और गोलियों की गड़गड़ाहट ने उनके जीवन का चैन और सुकून छीन लिया।

इस युद्ध ग्रस्त यमन तक पहुंचने वाली 75 प्रतिशत सहायता सामग्री अल-हुदैदा बंदरगाह से होकर जाती है।

अल-हुदैदा पर सऊदी सैन्य गठबंधन के भीषण हवाई हमलों से जान बचाकर भागने वाले 35000 परिवारों में फ़ुआद का भी परिवार था।

वे वहां से जान बचाकर बस से 6 घंटे की यात्रा के बाद 225 किलोमीटर दूर इब प्रांत पहुंचे।

39 वर्षीय फ़ुआद का कहना है कि वे वहां एक शरणार्थी कैम्प में तीन हफ़्ते ठहरे, जहां उन्हें कुछ खाना मिल जाता था।

उसके बाद उन्होंने वहां काम की तलाश शुरू कर दी, उन्हें ऐसी नौकरी मिली जो उन्हें अपने शहर वापस ले गई, लेकिन बिना परिवार के।

यह नौकरी थी, यमनी सेना और स्वयं सेवी बल अंसारुल्लाह (अल-हौसी) आंदोलन के ख़िलाफ़ लड़कर अमीर बनने की।

अल-हुदैदा पर क़ब्ज़ा करने के लिए सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात जहां भीषण हवाई हमले कर रहे हैं, वहीं ज़मीन पर लड़ने के लिए यमन के पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी के लड़ाकों पर जमकर पैट्रो डॉलर ख़र्च कर रहे हैं।

यहां सऊदी गठबंधन को ज़मीन पर लड़ने के लिए ऐसे किराए के लड़ाकों की ज़रूरत है, जो शहर से अच्छी तरह परिचित हों। इसलिए इसके लिए उन लोगों से अच्छा कौन होगा, जो यहां से अपनी जान बचाकर भागे हों।

फ़ुआद का कहना है कि उनके कुछ दोस्त सऊदी गठबंधन के लिए लड़ने के लिए प्रति माह 4000 हज़ार सऊदी रियाल (1,063 डॉलर) प्राप्त कर रहे थे, इसलिए इसने उन्हें भी आकर्षित किया। क्योंकि मोटरसाइलक कोरियर के काम से वे केवल 120 डॉलर ही कमा पाते थे।    

हालांकि नए भर्ती किए गए लड़ाकों को बिना किसी सैन्य प्रशिक्षण के हुदैदा में लड़ाई के मोर्चे पर भेजा जा रहा है।

फ़ुआद ने तीन महीने तक लड़ाई में शामिल होकर कुछ पैसा जमा करके अदन में एक घर किराए पर लेने की योजना बनाई।

लेकिन उनका कहना है कि यह सब उन्होंने भुखमरी के हाथों मजबूर होकर किया है।

सऊदी गठबंधन अल-हुदैदा में लड़ने वाले किराए के लड़ाकों को क़रीब 1000 डॉलर प्रतिमाह भुगतान करता है तो वहीं यमन के अन्य इलाक़ों में हौसियों के ख़िलाफ़ लड़ने वालों के केवल 120 डॉलर ही दिए जाते हैं।

फ़ुआद का कहना है कि मेरे सामने केवल दो विकल्प थे, या तो मैं अपने बच्चों को भूख से मरता हुआ देखता रहूं, या लड़ाई में भाग लेकर कुछ पैसा कमा लूं। इसलिए मैंने दूसरे विकल्प का चयन किया। msm