यमनी जनता का आशूरा से लिया जज़्बा और दुनिया की हैरानी
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लाखों की संख्या में यमनी नागरिकों ने आशूरा के जूलूसों में निकलकर लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नाज़िल्ला के नारे लगाकर हमलावरों के मुक़ाबले में प्रतिरोध पर बल दिया।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
Sep २१, २०१८ ११:३९ Asia/Kolkata

लाखों की संख्या में यमनी नागरिकों ने आशूरा के जूलूसों में निकलकर लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नाज़िल्ला के नारे लगाकर हमलावरों के मुक़ाबले में प्रतिरोध पर बल दिया।

आशूर के दिन यमन में सनआ और सादा सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में आशूर के जूलूस निकाले गये तथा यमनी जनता ने हमलावरों के मुक़ाबले में प्रतिरोध पर बल दिया। यमन की सड़कें लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नज़्ज़िला के नारों से गूंज उठीं। आशूर के जूलूस में शामिल यमनी नागरिकों ने बल दिया कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम, इतिहास में क्रांति के महान नेता और स्वतंत्रता प्रेमियों के प्रतीक हैं और यमनी जनता ने प्रतिरोध और डटे रहने की भावना आशूरा की घटना से प्राप्त की है।यमनी जनता ने राजधानी सनआ और सादा प्रांत सहित अपने देश के विभिन्न शहरों में आशूरा के जूलूस निकाले और लब्बैक या हुसैन और हयहात मिन्नज़्ज़िला के नारे लगाए और बल दिया कि वह अमरीका के आगे कदापि नहीं झुकेगी।

इतिहास के परिवर्तनों पर नज़र डालने से आशूरा के चमत्कारिक प्रभावों का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। 1400 से अधिक साल बीतने के बावजूद आज भी पूरी दुनिया में लब्बैक या हुसैन की आवाज़ सुनाई दे रही है और पूरी दुनिया में हुसैनी ध्वज लहरा रहा है। 

यमनी संघर्षकर्ताओं ने भी आशूर के दिन इमाम हुसैन और उनके निष्ठावान साथियों से प्रतिरोध और संघर्ष से प्रेरणा लेते हुए दुनिया को अपने प्रतिरोध और बलिदानों से हैरान कर दिया है। आशूरा की स्वतंत्रता प्रेमी शिक्षा, हर प्रकार के वर्चस्व को नकारती हैं और यही भावना यमनी जनता में जोश मार रही है जो अपनी कम से कम क्षमताओं से अमरीका और उसके घटक सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के दांत खट्टे किए हुए है। (AK)