स्वेडन में शांति वार्ता का हिस्सा बनेगी सनआ सरकार
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यमन के अलग अलग पक्षों के बीच स्वेडन में शांति वार्ता शुरू करने की तैयारी हो रही है। यमन की उच्च राजनैतिक परिषद के प्रमुख महदी अलमुश्शात ने कहा कि सनआ सरकार दिसम्बर महीने के शुरू में स्वेडन में आयोजित होने वाली शांति वार्ता में भाग लेगी।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ३०, २०१८ १४:१८ Asia/Kolkata

यमन के अलग अलग पक्षों के बीच स्वेडन में शांति वार्ता शुरू करने की तैयारी हो रही है। यमन की उच्च राजनैतिक परिषद के प्रमुख महदी अलमुश्शात ने कहा कि सनआ सरकार दिसम्बर महीने के शुरू में स्वेडन में आयोजित होने वाली शांति वार्ता में भाग लेगी।

यमन पर सऊदी अरब ने वर्ष 2015 से युद्ध थोप रखा है और वह देश के अपदस्थ राष्ट्रपति और उनके समर्थकों को सत्ता में लाना चाहती है सऊदी अरब की इस कोशिश का प्रतिरोध यमन की जनता, सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से किया जा रहा है।

बहरहाल अब स्वेडन में शांति वार्ता शुरु होने जा रही है तो अंसारुल्लाह आंदोलन ने कहा है कि अगर सऊदी अरब की ओर से कोई रुकावट न खड़ी की गई तो सनआ सरकार शांति वार्ता में हिस्सा लेगी। सर्वोच्च क्रांतिकारी परिषद के प्रमुख मुहम्मद अली अलहौसी ने गुरुवार की रात अपने ट्वीटर एकाउंट पर लिखा कि नेशनल सैल्वेशन गवर्नमेंट का प्रतिनिधिमंडल सनआ से जाने और वापस आने की ठोस गैरेंटी मिलने के बाद तीन दिस्मबर को स्वेडन पहुंच जाएगा। इससे पहले जेनेवा में वार्ता होने वाली थी लेकिन सऊदी अरब ने सनआ के प्रतिनिधिमंडल की स्वीज़रलैंड यात्रा के रास्ते में रुकावटें डालीं अतः वार्ता नहीं हो पायी। सऊदी अरब और उसके घटक इस प्रकार की हरकत और भी कई बार कर चुके हैं।

यमन में असारुल्लाह आंदोलन एक मज़बूत और लोकप्रिय राजनैतिक ताक़त के रूप मे मौजूद है और किसी भी राजनैतिक वार्ता में उसकी उपस्थिति अनिवार्य है। सऊदी अरब इस आंदोलन को राजनैतिक वार्ता और राजनैतिक प्रक्रिया से अलग रखने की नाकाम कोशिश कर रहा है। बहरहाल संयुक्त राष्ट्र संघ को अच्छी तरह मालूम है कि देश के भीतर अंसारुल्लाह आंदोलन की क्या पोज़ीशन है अतः यमन के मामलों में संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष दूता मार्टिन ग्रीफ़ीथ ने भी कहा कि यमन से संबंधित किसी भी वार्ता में अंसारुल्लाह आंदोलन का उपस्थित रहना ज़रूरी है।

यमन में अंसारुल्लाह आंदोलन के साथ ही दूसरे भी राजनैतिक संगठन और दल हैं जो आपसी बातचीत से देश की राजनीति का भविष्य तय कर सकते हैं मगर सबसे बड़ी समस्या यह है कि सऊदी अरब इस देश की पूरी राजनैतिक प्रक्रिया को हाईजैक करने की कोशिश कर रहा है। यमन पर युद्ध भी इसीलिए थोपा गया मगर लगभग चार साल तक युद्ध जारी रहने के बाद सऊदी अरब को कोई सफलता नहीं मिली बल्कि उस पर अब भारी दबाव पड़ रहा है कि यमन युद्ध समाप्त करे। अंसारुल्लाह आंदोलन को राजनैतिक प्रक्रिया से दूर रखने की कोशिश में सऊदी अरब पूरे यमन को अपना दुशमन बना बैठा है।