दुधारू गाए को अब परमाणु हथियारों के बहाने दुहेगा अमरीका
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समाचार एजेन्सी सीएनएन की वेबसाइट ने अपनी एक समीक्षा में लिखा है कि सऊदी अरब हथियारों की दौड़ में तो पहले ही कूद चुका था और अब जिसके बारे में बहुत कम ही सुना गया है वह यह है कि रियाज़ परमाणु हथियारों की प्राप्ति का प्यासा है और ट्रम्प परिवार इस बारे में उसकी मदद कर रहा है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Jun ०८, २०१९ २०:४९ Asia/Kolkata
  • दुधारू गाए को अब परमाणु हथियारों के बहाने दुहेगा अमरीका

समाचार एजेन्सी सीएनएन की वेबसाइट ने अपनी एक समीक्षा में लिखा है कि सऊदी अरब हथियारों की दौड़ में तो पहले ही कूद चुका था और अब जिसके बारे में बहुत कम ही सुना गया है वह यह है कि रियाज़ परमाणु हथियारों की प्राप्ति का प्यासा है और ट्रम्प परिवार इस बारे में उसकी मदद कर रहा है।

सीएनएन के प्रसिद्ध विश्लेषक निक पैटन वॉल्श ने अपने लेख में लिखा कि शायद वाशिंग्टन ने स्वयं को इस दावे में उलझा लिया है कि ईरान परमाणु हथियारों की प्राप्ति के प्रयास में है किन्तु वह अपनी इस करतूत से क्षेत्र में हथियारों की होड़ को तेज़ करने का कारण बन गया है, यह ऐसी दौड़ है जिसमें वाइट हाऊस में मौजूद वर्तमान परिवार और सऊदी राजमहल में मौजूद वर्तमान परिवार एक दूसरे के संपर्क में हैं।

अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने क्षेत्र की स्थिति को लेकर जो हो हल्ला मचा रखा है उसी के कारण उन्होंने सऊदी अरब के साथ 110 अरब डॉलर का सैन्य समझौता किया।

सीएनएन के पत्रकार लिखते हैं कि इसके हटकर ट्रम्प प्रशासन ने पिछले महीने अमरीकी कांग्रेस को धोखा देकर तथा ईरान के साथ ख़तरा बढ़ने के दावे के साथ आपातकालीन स्थिति की घोषणा करके सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और जार्डन को आठ अरब डॉलर के हथियार बेच डाले।

निक पैटन वॉल्श ने लिख कि किन्तु सऊदी अरब ख़राब हालात का दुरुपयोग करते हुए अमरीका से प्रचलित और अप्रचलित हर प्रकार के हथियार जमा करने के प्रयास में है, उसे वाशिंग्टन के प्रतिस्पर्धियों से भी सामूहिक विनाश के हथियार और अप्रचलित शस्त्र ख़रीदने की अपील की है।

अमरीकी टीकाकार लिखते हैं कि अमरीकी कांग्रेस के पास मौजूद गुप्त दस्तावेज़ और सूचनाओं से पता चलता है कि रियाज़ ने हालिया वर्षों में बैलेस्टिक मीज़ाइल ख़रीदने के लिए बीजिंग का भी रुख़ किया जबकि वर्ष 1987 में होने वाला समझौता रियाज़ को उस तकनीक की ख़रीदारी से रोकता है जो आम तबाही के हथियारों की प्राप्त का कारण बने। यही कारण है कि सऊदी अरब ने मजबूर होकर इस बारे में चीन की ओर हाथ बढ़ा दिया।

सऊदी नरेश क्षेत्र में सबसे बड़ा और बेहतरीन हथियारों का भंडार स्वयं से विशेष करना चाहते हैं और यही कारण है कि अमरीकी विदेशमंत्रालय ने घोषणा की है कि रियाज़ को आम तबाही फैलाने वाले हथियारों के निरस्त्रीकरण पर प्रतिबद्ध रहना होगा।

इर्ना ने रिपोर्ट दी है कि सऊदी अधिकारियों ने दावा किया है कि समुद्र के पानी को मीठा बनाने के लिए उन्हें एक परमाणु रिएक्टर की आवश्यकता है किन्तु इस प्रकार के रिएक्टर की गुप्त ख़रीदारी ने सभी की चिंता बढ़ा दी है ।

सीएनएन के टीकाकार लिखते हैं कि युद्ध और झड़पों से ऊब चुके क्षेत्र में सऊदी अरब को परमाणु हथियारों से लैस करने का वाशिंग्टन का फ़ैसला, फ़लीते में आग लगाने जैसा होगा जिसका धमाका दूर दूर तक यहां तक अमरीका और यूरोप तक भी पहुंचेगा। (AK)