फिर उठा ख़शोगी की हत्या का मामला
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23 अक्तूबर 2018 को जमाल ख़ाशुक़जी के परिवार के सदस्यों से बात करते शासक सलमान (दाएं) और युवराज बिन सलमान (दाएं से दूसरे) (एएफ़पी के सौजन्य से)
सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने इस देश की शासन व्यवस्था से मतभेद रखने वाले पत्रकार जमाल ख़शोगी या ख़ाशुक़जी की हत्या से कि जिनकी हत्या से उनकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर छवि ख़राब हुयी, फ़ायदा न उठाने पर बल दिया है जो तुर्की पर अप्रत्यक्ष रूप से हमला है क्योंकि तुर्की जमाल ख़ाशुकजी के शव की स्थिति को स्पष्ट करने के लिए रियाज़ पर दबाव डाल रहा है।
तुर्क प्रशासन ने सबसे पहले ख़ाशुक़जी की हत्या की रिपोर्ट की थी जब वह 2 अक्तूबर 2018 को इस्तांबूल स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में दाख़िल होने के बाद से लापता हो गए थे और वह सऊदी शासन पर ख़ाशुक़जी के क्षत विक्षत शव की स्थिति की सूचना जारी करने पर दबाव डाल चुका है।
मोहम्मद बिन सलमान ने अरब दैनिक अख़बार अश्शर्क़ अलऔसत से इंटरव्यू में जो रविवार को प्रकाशित हुआ, कहा कि ख़ाशुक़जी की हत्या बहुत ही दर्दनाक अपराध है।
सऊदी युवराज ने तुर्की का सीधे तौर पर नाम न लेते हुए कहाः" कोई भी पक्ष इस मामले से राजनैतिक फ़ायदा उठाना चाहता है तो ऐसा न करे बल्कि सऊदी अदालत में सुबूत पेश करे ताकि न्याय दिलाने में मदद मिले।"
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब तुर्की सहित सभी इस्लामी देशों के साथ मज़बूत संबंध क़ायम करने में रूचि रखता है।
ग़ौरतलब है कि ख़ाशुक़जी को जो सऊदी अदालत में वकील थे और बाद में बिन सलमान के आलोचक हो गए थे, 2 अक्तूबर 2018 को इस्तांबूल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में प्रलोभन के ज़रिए बुलाया गया और सऊदी अरब के हिट स्कवाएड ने उनकी हत्या करके उनका शव को क्षत विक्षत कर दिया था।(MAQ/N)