बैतुल मुक़द्दस के बारे में हसन नसरुल्लाह की इच्छा क्या है?
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लेबनान के हिज़बुल्लाह संगठन के महासचिव ने अलमनार टीवी चैनल को दिए गए एक लम्बे इंटरव्यू में बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा के बारे में अपनी दिली इच्छा बयान की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul १३, २०१९ १३:५९ Asia/Kolkata
  • बैतुल मुक़द्दस के बारे में हसन नसरुल्लाह की इच्छा क्या है?

लेबनान के हिज़बुल्लाह संगठन के महासचिव ने अलमनार टीवी चैनल को दिए गए एक लम्बे इंटरव्यू में बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़सा के बारे में अपनी दिली इच्छा बयान की है।

सैयद हसन नसरुल्लाह ने इस इंटरव्यू में कहा कि उनकी हार्दिक इच्छा है कि एक दिन वे बैतुल मुक़द्दस में नमाज़ पढ़ें। उन्होंने कहा कि आयु ईश्वर के हाथ में है और तर्क व समय के आधार पर मैं उन लोगों में से हूं जिन्हें बहुत अधिक आशा है कि वे ईश्वर की इच्छा से जल्द ही मस्जिदुल अक़सा में नमाज़ अदा करेंगे। इस इंटरव्यू के एक अन्य भाग में उन्होंने कहा कि हिज़्बुल्लाह, इस्राईल में बहुत अधिक तबाही फैलाने की क्षमता रखता है। उन्होंने कहा कि एक राज़ है जिसमें उसका समय आने तक फ़ाश नहीं करूंगा और मेरी इस बात को इस्राईली अच्छी तरह समझते हैं।

 

सैयद हसन नसरुल्लाह ने कहा कि मुझे नहीं लगता कि इस्राईली कोई नया युद्ध शुरू करेंगे क्योंकि वे जानते हैं कि लेबनान के ख़िलाफ़ नई लड़ाई शुरू करने का नतीजा जुलाई 2006 के युद्ध से कहीं अधिक भयानक होगा और यह युद्ध इस्राईल को तबाही व अंत की ओर ले जाएगा। उन्होंने ज़ायोनी अधिकारियों से कहा कि वे लेबनान को पाषाण युग में पहुंचाने जैसी बातें करना बंद करें क्योंकि हिज़बुल्लाह, इस्राईल पर दस हज़ार मीज़ाइल बरसाने की क्षमता रखता है और अगर उसने ऐसा किया तो इस्राईल का कोई भी क्षेत्र सुरक्षित नहीं रहेगा और इसका मतलब इस्राईल के लिए पाषाण युग होगा और ज़ायोनियों का व्यापक जनसंहार, इस संभावित क़दम का केवल एक भाग है।

 

सैयद हसन नसरुल्लाह के इस इंटरव्यू में जो बात सबसे अहम है वह उनका विश्वास है। हर भाषण और इंटरव्यू में उनका विश्वास देखने योग्य होता है लेकिन इस बार उनके विश्वास का स्तर कुछ अलग ही है। इसी तरह उन्होंने बैतुल मुक़द्दस में शीघ्र ही नमाज़ पढ़ने और इस्राईल की तबाही के बारे में जिस तरह से बातें की हैं उनसे यही लगता है कि प्रतिरोध के मोर्चे ने ज़ायोनी शासन के संभावित हमले का जवाब देने की रणनीति तैयार कर रखी है बल्कि उस पर अमल के लिए इशारे की देर है। वास्तविकता भी यही है कि दसियों साल से हिज़्बुल्लाह, किसी भी मोर्चे पर पराजित नहीं हुआ है और इस्राईल, सत्तर के दशक के बाद से किसी भी युद्ध में वांछित परिणाम हासिल नहीं कर सका है। (HN)