लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेतनयाहू के क्या हैं क्रियाकलाप
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धोखाधड़ी, रिश्वत लेने, सरकारी सुविधाओं का दूरुपयोग करने और विश्वासघात के आरोपी नेतनयाहू, इस्राईल पर राज करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २१, २०१९ १५:५३ Asia/Kolkata
  • लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने वाले नेतनयाहू के क्या हैं क्रियाकलाप

धोखाधड़ी, रिश्वत लेने, सरकारी सुविधाओं का दूरुपयोग करने और विश्वासघात के आरोपी नेतनयाहू, इस्राईल पर राज करने वाले पहले प्रधानमंत्री बने हैं।

धोखाधड़ी, रिश्वत लेने, सरकारी सुविधाओं का दूरुपयोग करने और विश्वासघात के आरोपी नेतनयाहू अब इस्राईल के ऐसे प्रधानमंत्री बन चुके हैं जिन्होंने सबसे लंबे समय तक अवैध ज़ायोनी शासन पर राज किया है।  बेनयमिन नेतनयाहू, शनिवार को इस्राईल पर राज करने वाले ऐसे प्रधानमंत्री बन गए जो पिछले 13 वर्षों और 127 दिन से इसी पद पर विराजमान हैं।  येरूशलम पोस्ट के अनुसार अवैध ज़ायोनी शासन के गठन को अब पच्चीस हज़ार नौ सौ इक्यासी (25981) दिन हो चुके हैं।  इस दौरान नेतनयाहू 4875 दिनों तक इस शासन के प्रधानमंत्री बने रहे।  उनसे पहले डेविड बिन गोरियन, इस्राईल पर लंबे समय तक राज कर चुके हैं।  नेतनयाहू को पांचवीं बार चुन तो लिया गया किंतु इस्राईल के आंतरिक मतभेदों के कारण नेतनयाहू अपनी सरकार का अभीतक गठन नहीं कर सके।

अवैध ज़ायोनी शासन के प्रमुख नेतनयाहू, पर भ्रष्टाचार के कई आरोप हैं।  उनपर धोखाधड़ी, रिश्वत लेने, सरकारी सुविधाओं का दूरुपयोग करने और विश्वासघात जैसे कई आरोप हैं।  एसी ख़बरें भी आई थीं कि 2009 के चुनावी अभियान में नेतनयाहू ने चुनावों में अपनी जीत के लिए एक फ़्रांसीसी दलाल को लाखों यूरो दिये थे।  विशेष बात यह है कि नेतनयाहू की पत्नी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध हो चुके हैं।  भ्रष्टाचार में लिप्त होने के कारण नेतनयाहू से कई बार त्यागपत्र देने की मांग की जा चुकी है किंतु हर बार वे उसे नकारते आए हैं।

25981 दिनों तक अवैध ज़ायोनी शासन पर राज करने वाले नेतनयाहू के सत्ताकाल में राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में फ़िलिस्तीनियों पर खुलकर अत्याचार किये गए।  फ़िलिस्तीनियों को इस्राईल की ओर से वैसे तो हर प्रकार से परेशान किया जाता रहा है किंतु नेतनयाहू के शासनकाल में फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध हिंसात्मक कार्यवाहियों में बहुत तेज़ी से वृद्धि हुई है।  नेतनयाहू ने अवैध कालोनी निर्माण के काम को भी बढ़ावा दिया जो फ़िलिस्तीनियों के साथ हिंसा में अधिक वृद्धि का कारण बना।  कुछ जानकारों का कहना है कि नेतनयाहू ने जितना भी हो सका अपने सत्ताकाल में फ़िलिस्तीनियों के विरुद्ध कार्यवाहियां जारी रखीं।  इस्राईल के प्रधानमंत्री के रूप में नेतनयाहू ने अमरीका को बहुत सुविधाएं दीं जैसे अमरीकी दूतावास को तेलअवीव से बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित किया जाना या अमरीकी योजना डील आफ सेंचुरी को गति प्रदान कराना आदि।

बिनयमिन नेतनयाहू की इन समस्त कार्यवाहियों और गतिविधियों के दृष्टिगत समीक्षकों का कहना है कि उन्होंने जो मार्ग अपनाया है वह न केवल उनके लिए बल्कि पूरे इस्राईल के लिए बहुत ही घातक सिद्ध होगा।  नेतनयाहू को एक कट्टरपंथी नेता के रूप में देखा जाता है।  उनकी नीतियां, इस्राईल के विनाश की भूमिका बनती जा रही हैं।  वह इस्राईल जिसे एक समय मध्यपूर्व में सबसे शक्तिशाली कहा जाता था आज वह फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोधी गुटों के सामने पूरी तरह से असहाय सा दिखाई दे रहा है।  मुट्ठीभर फ़िलिस्तीनी जियालों ने इस्राईल की नाक में दम कर रखा है।  अब स्थिति यह हो गई है कि नेतनयाहू ने फ़िलिस्तीनियों के मुक़ाबले से बचने के लिए मिस्र से मध्यस्थता की गुहार लगाई है।  आने वाला समय ही बताएगा कि इस्राईल के सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री बने रहने वाले नेतनयाहू की नीतियां, अवैध ज़ायोनी शासन के लिए कितनी लाभदायक रही हैं?