अदन की लड़ाई सऊदी व इमारात की हैः रायुल यौम
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मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने संपादकीय में लिखा है कि दक्षिणी यमन के अदन शहर में सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के बीच होने वाली प्राॅक्सी वाॅर इस बात की सूचक है कि उनका गठबंधन, दुश्मनी में बदल चुका है और इस स्थिति में विजेता अंसारुल्लाह आंदोलन है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug ११, २०१९ १२:४९ Asia/Kolkata
  • अदन की लड़ाई सऊदी व इमारात की हैः रायुल यौम

मशहूर अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने संपादकीय में लिखा है कि दक्षिणी यमन के अदन शहर में सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के बीच होने वाली प्राॅक्सी वाॅर इस बात की सूचक है कि उनका गठबंधन, दुश्मनी में बदल चुका है और इस स्थिति में विजेता अंसारुल्लाह आंदोलन है।

रायुल यौम ने लिखा है कि अदन में इमारात और सऊदी अरब के बीच जो भीषण छद्म युद्ध हो रहा है वह दो अत्यंत निकट और एक दूसरे के मज़बूत घटकों अर्थात रियाज़ व अबू धाबी के बीच गहरे मतभेदों का सूचक है। ये मतभेद इमारात द्वारा, यमन से अपने सैनिकों को बाहर निकालने और यमन में अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त करने के फ़ैसले और इसी तरह एक सुरक्षा दल ईरान भेजने के कारण चरम पर पहुंच गए हैं।

 

पत्र ने लिखा है कि अरब देशों के बीच संबंध बड़ी तेज़ी से बदलते हैं और अधिकतर, गठजोड़ व दोस्ती में अतिशयोक्ति से दुश्मनी में अतिशयोक्ति में बदल जाते हैं और ऐसा लगता है कि यह नियम इस समय सऊदी अरब और इमारात के संबंधों में लागू हो रहा है। पत्र ने लिखा है कि अदन में संघर्षरत पक्षों से धैर्य व संयम बरतने, झड़पें रोकने और ईदुल अज़हा के उपलक्ष्य में एक अस्थायी संघर्ष विराम लागू करने के निरंतर आग्रह हो रहे हैं लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही दर्शाती है। इमारात की सरकार ने दक्षिणी क्षेत्रों के पृथकतावादियों और उनके नियंत्रण वाली सरकार के समर्थन की घोषणा कर रखी है। इस संबंध में अबू धाबी के युवराज समझे जाने वाले मुहम्मद बिन ज़ायद के प्रवक्ता समझे जाने वाले अब्दुल ख़ालिक़ अब्दुल्लाह ने कहा भी है कि अब यमन पहले की तरह एकजुट नहीं रह पाएगा।

 

दूसरी ओर सऊदी अरब, मंसूर हादी का समर्थक है और उनकी सरकार के समर्थन के बहाने ही उसने यमन पर पांच साल से युद्ध थोप रखा है। इसी लिए उसने अपने टैंकों व युद्धक विमानों को अदन भेज दिया कि वे इमारात के समर्थन वाली अंतरिम परिषद के बलों से लड़ जाएं और उन्हें अदन पर क़ब्ज़ा न करने दें। इन सब बातों के दृष्टिगत अदन में जारी रक्तरंजित झड़पों से उत्पन्न होने वाले संकट का त्वरित समाधान संभव दिखाई नहीं देता लेकिन अस्थायी संघर्ष विराम की संभावना ज़रूर है लेकिन उसके बाद सऊदी अरब और इमारात के समर्थक बलों के बीच प्राॅक्सी वाॅर संभवतः अधिक भीषण हो जाएगी।

 

समाचारपत्र रायुल यौम ने अंत में लिखा है कि संयुक्त अरब इमारात और सऊदी अरब, यमन में युद्ध हार चुके हैं। पहले ने पीछे हटने और अपने सैनिकों को बाहर निकालने का फ़ैसला किया है जबकि दूसरा बाहर निकलने की कोशिश में है क्योंकि वह अपने आपको अंसारुल्लाह के मुक़ाबले में अकेला देख रहा है। इस संगठन ने सऊदी अरब के काफ़ी अंदर तक हमले किए हैं और उसके अनेक हवाई अड्डों को बंद करा दिया है। शायद इस बात का दावा करना ग़लत न हो कि हूसी, यमन का युद्ध जीत गए हैं क्योंकि उन्होंने भरपूर प्रतिरोध का प्रदर्शन किया जिसके चलते उनके विरोधी गठबंधन में दराड़ पड़ गई है। अदन में जारी रक्तरंजित झड़पें इसका प्रमाण हैं। (HN)