क्या नेतनयाहू राजनीति के क़ब्रस्तान में पहुंच गए हैं?
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ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ इस्राईल के अटार्नी जनरल का बयान, उनके राजनैतिक भविष्य पर करारी चोट है और कुछ टीकाकारों का कहना है कि नेतनयाहू अब तक अनेक राजनैतिक संकटों से निकल चुके हैं लेकिन इस बार स्थिति इतनी कठिन है कि उनकी राजनैतिक मौत की संभावना प्रबल है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov २७, २०१९ १७:१४ Asia/Kolkata
  • क्या नेतनयाहू राजनीति के क़ब्रस्तान में पहुंच गए हैं?

ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ इस्राईल के अटार्नी जनरल का बयान, उनके राजनैतिक भविष्य पर करारी चोट है और कुछ टीकाकारों का कहना है कि नेतनयाहू अब तक अनेक राजनैतिक संकटों से निकल चुके हैं लेकिन इस बार स्थिति इतनी कठिन है कि उनकी राजनैतिक मौत की संभावना प्रबल है।

ऐसा लगता है कि बेनयामिन नेतनयाहू वर्ष 2019 को सबसे बुरे रूप में विदा कहने वाले हैं। अस्ल में इस्राईली न्यायपालिका के अधिकारियों ने नेतनयाहू के भ्रष्टाचार वाले मामलों में जिस तरह के बयान दिए हैं उनसे यह संभावना बढ़ गई है कि संसदीय चुनाव में दो बार हारने और सरकार बनाने में अक्षम रहने के बाद उन्हें जेल में अपनी राजनैतिक मौत का मुंह देखना पड़ेगा। इस्राईली मीडिया का कहना है कि नेतनयाहू व उनके परिवार की आर्थिक गतिविधियों की न्यायिक जांच के बाद उन पर कई तरह के आरोप लगे हैं। धनवान लोगों से मंहगे तोहफ़े लेना, एक मशहूर संचार माध्यम पर विशेष बातों के प्रकाशन के लिए दबाव डालना और जर्मनी से कुछ समुद्री हथियारों की ख़रीदारी ऐसे तीन केस हैं जो उनके ख़िलाफ़ जारी हैं। इसी बीच इस्राईल के अटार्नी जनरल ने नेतनयाहू के ख़िलाफ़ चार्ज शीट भी दाख़िल कर दी है और साथ ही कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपने संवैधानिक पद से हटने की ज़रूरत नहीं है।

 

इस समय अतिग्रहित फ़िलिस्तीन के हालात दो पहलुओं से अभूतपूर्व हैं। एक तो यह है कि इस्राईलियों को संभावित रूप से तीसरे संसदीय चुनाव में  वोट डालना पड़ेगा और दूसरी ओर पहली बार किसी प्रधानमंत्री को अपने पद पर रहते हुए आरोपी बनाया गया है। लिकुड पार्टी और उसके नेता नेतनयाहू के लिए इससे भी बुरी बात यह है कि जनमत में उनकी छवि बहुत ख़राब हो चुकी है। प्रबल संभावना यह है कि इस्राईली में तीसरी बार संसदीय चुनाव होंगे और लिकुड पार्टी अत्यंत बुरी दशा में जनता से वोट मांगने की कोशिश करेगी। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि इस बार उसे पिछले दो चुनावों से अधिक बुरी हार का सामना करना पड़ेगा। इन्हीं बातों के चलते पिछले कुछ दिनों के दौरान लोगों ने तेल अवीव में प्रदर्शन करके "अपराधी प्रधानमंत्री" को पदमुक्त किए जाने और उसके ख़िलाफ़ मुक़द्दमा चलाने की मांग की है। नेतनयाहू पर जो आरोप लगे हैं, उन्होंने उनकी स्थिति पहले से ज़्यादा ख़राब कर दी है। अटार्नी जनरल ने उन पर धोखाधड़ी, घूस लेने और अपनी क़सम तोड़ने का आरोप लगाया है जिसके चलते उनका राजनैतिक भविष्य अधिक अंधकारमय हो गया है। इसकी एक वजह यह है कि वे इस्राईल के एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री हैं जिस पर पद पर रहते हुए औपचारिक रूप से आरोप लगाया गया है।

 

कुछ टीकाकारों का कहना है कि नेतनयाहू का अंजाम एहुद ओलमर्ट जैसा ही होने वाला है। ओलमर्ट 2006 से 2009 तक इस्राईल के प्रधानमंत्री थे और भ्रष्टाचार के कई मामलों में दोषी पाए जाने के बाद उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था और फिर उन्हें छः साल जेल की सज़ा सुनाई गई। वे धीरे धीरे इस्राईल के राजनैतिक मंच से ग़ायब हो गए और अब पूरी तरह से गुमनामी का जीवन बिता रहे हैं। रोचक बात यह है कि नेतनयाहू ने सन 2009 में ओलमर्ट का स्थान लिया था और इस्राईल के प्रधानमंत्री बने थे। (HN)