जब दिया रंज बुतों ने तो ख़ुदा याद आया...
ईरान के विरुद्ध अमरीका द्वारा सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किए जाने को अभी एक दिन बाक़ी है कि क़तर और फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के पांच सदस्य देशों ने सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह ईरान के विरुद्ध हथियारों के प्रतिबंधों की समयावधि बढ़ा दे।
मंगलवार को अमरीका सुरक्षा परिषद में ईरान के विरुद्ध लगे प्रतिबंधों की समयावधि बढ़ाने का प्रस्ताव पेश करेगा जो वर्तमान हालात को देखकर ऐसा लगता है कि बुरी तरह मुंह के बल गिर पड़ेगा। रविवार को फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के 6 सदस्य देशों ने सुरक्षा परिषद से मांग की है कि वह ईरान के विरुद्ध उक्त प्रतिबंधों को जो अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार ख़त्म होने वाले हैं, बढ़ा दे।
इस मामले में सबसे बड़ा कमाल को क़तर ने किया जिसने बिना कुछ कहे सऊदी अरब और अन्य सदस्य देशों की हां में हां करते हुए ईरान के विरुद्ध हथियारों के प्रतिबंधों की समयावधि बढ़ाने की बात कह दी। उसने इस विषय में सदस्य देशों से पूछना तक गवारा नहीं किया।
यहां पर यह सोचने की बात है कि आख़िर क़तर ने ऐसा क्यों किया? आइये क़तर के इतिहास पर भी एक नज़र डाल लेते हैं, तीन साल पहले सऊदी अरब और उसके निकटवर्तियों ने क़तर का पूरी तरह परिवेष्टन कर लिया था और यहां तक कि बाहरी दुनिया से संपर्क के एक मात्र ज़मीनी रास्ते को भी बंद करने और समुद्र में डुबोकर मार डालने की धमकी दे दी थी, उस समय क़तर को ईरान के अलावा कोई दूसरा दिखाई नहीं दिया और उसने तेहरान की शरण ली और अब एक बार फिर इस देश ने ईरान को पीठ दिखाई और फ़ार्स की खाड़ी के रजवाड़ों का साथ दिया।
यद्यपि फ़ार्स की खाड़ी के नये अध्यक्ष ओमान और उतराधिकारी का संकट झेल रहे कुवैत से ईरान के विरुद्ध फ़ार्स की खाड़ी सहयोग परिषद के साथ सहयोग के अलावा कोई और उम्मीद नहीं की जा सकती थी किन्तु क़तर द्वारा कल तक के अपने सबसे ख़तरनाक दुश्मन की गोद में बैठना, आश्चर्यजनक बात है। लग रहा है कि क़तर, रियाज़ के साथ संबंधों को फिर से बनाने के लिए सऊदी अरब की ओर से पेश की गयी 11 शर्तों पर धीरे धीरे अमल करना शुरु कर रहा है और सऊदी अरब के इतिहास पर नज़र डालने से पता चलता है कि वह एक ख़तरनाक नाग की भांति है जैसे ही उसे मौक़ा मिलता है डस लेता है। (AK)
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