मुसलमानों से ग़द्दारी और इस्राईल से वफ़ादारीः अलहौसी
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यमन के जनआंदोलन अंसारुल्लाह के महासचिव ने कहा है कि, इस्राईल और संयुक्त अरब इमारात के बीच रिश्ता कोई नया नहीं है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और बहरैन जैसे कुछ अन्य अरब देशों के भी इस्राईल के साथ संबंध हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २१, २०२० ०७:२१ Asia/Kolkata
  • मुसलमानों से ग़द्दारी और इस्राईल से वफ़ादारीः अलहौसी

यमन के जनआंदोलन अंसारुल्लाह के महासचिव ने कहा है कि, इस्राईल और संयुक्त अरब इमारात के बीच रिश्ता कोई नया नहीं है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब और बहरैन जैसे कुछ अन्य अरब देशों के भी इस्राईल के साथ संबंध हैं।

अलमयादीन टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक़, यमन के जनआंदोलन अंसारुल्लाह के महासचिव ने मोहर्रम का महीना शुरू होने के मौक़े पर गुरुवार को दिए अपने भाषण में संयुक्त अरब इमारात और ज़ायोनी शासन के बीच हुए शर्मनाक और षड्यंत्रकारी समझौते की ओर इशारा करते हुए कहा कि, मुद्दा यह नहीं है कि संबंध सामान्य किए गए हैं, बल्कि मुद्दा यह है कि इस्राईल जैसे दुश्मन के साथ वफ़ादारी और मुसलमानों से ग़द्दारी की बात है। उन्होंने कहा कि एक ओर संयुक्त अरब इमारात मुसलमानों के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़े हुए है तो दूसरी ओर ज़ायोनी शासन के साथ शांति स्थापित कर रहा है। अब्दुल मलिक बद्रुद्दीन अल-हौसी ने कहा कि जो कोई भी दुश्मन के साथ संबंध स्थापित करता है, वह अरब राष्ट्रों के हो रहे उत्पीड़न, उनपर हो रहे अत्याचार  और उनके ख़िलाफ़ हो रही साज़िशों में बराबर का भागीदार है।

यमन के जनआंदोलन अंसारूल्लाह के महासचिव ने कहा कि अबू धाबी यह झूठा दावा करता है कि वह क्षेत्र में शांति स्थापित करने की कोशिश में लगा हुआ है। उन्होंने प्रश्न किया कि, पिछले लगभग 6 वर्षों से यमन पर सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात द्वारा बनाए गए गठबंधन के ज़रिए ही यमन पर हमला किया जा रहा है और आम लोगों का ख़ून बहाया जा रहा है, क्या यह उसके द्वारा शांति स्थापित करने की कोशिश का हिस्सा है? अल-हौसी ने कहा कि क्षेत्र में होने वाली सभी तरह की नकारात्मक और विनाशकारी कार्यवाहियां जो सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात और अन्य हमलावर अरब देशों द्वारा अंजाम दी जा रही हैं उन सभी में उनकी इस्राईल के साथ भागीदारी है।

उल्लेखनीय है कि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने हाल ही में इस्राईल और संयुक्त अरब इमारात के बीच हुए एक शर्मनाक और षड्यंत्रकारी समझौते की अपने ट्वीट के ज़रिए ख़बर दी थी। उन्होंने इस समझौते को ऐतिहासिक समझौता बताया था। जिसके बाद इस्राईल और यूएई ने भी आधिकारिक तौर पर इस समझौते का एलान किया था। इन दो शासनों के बीच हुए शर्मनाक समझौते का फ़िलिस्तीन सहित सभी इस्लामी देशों में व्यापक स्तर पर विरोध हो रहा है। (RZ)


 

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