सऊदी अरब आर्थिक दीवालियेपन की कगार पर
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यमन में सैनिक उपस्थिति और क्षेत्र के दूसरे देशों में हस्तक्षेप के कारण सऊदी अरब को बजट में अभूतपूर्व घाटे का सामना है और इस देश की आर्थिक स्थिति बहुत विषम हो गयी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २५, २०१६ १५:२५ Asia/Kolkata

यमन में सैनिक उपस्थिति और क्षेत्र के दूसरे देशों में हस्तक्षेप के कारण सऊदी अरब को बजट में अभूतपूर्व घाटे का सामना है और इस देश की आर्थिक स्थिति बहुत विषम हो गयी है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रोकोष IMF ने घोषणा की है कि सऊदी अरब को 140 अरब डॉलर बजट घाटे का सामना है और सऊदी सूत्रों ने स्वीकार किया है कि आर्थिक समस्याओं के समाधान के लिए नई शैलियों का चयन अपरिहार्य हो गया है। सऊदी अरब में निवेशकोष ने घोषणा की है कि आर्थिक समस्याओं से मुकाबले के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश से यह कोष बैंक कर्म अधिकारियों और विश्व के अर्थशास्त्रियों से लाभ उठाकर इस समय की अनुचित आर्थिक स्थिति से बाहर निकलने के लिए नया सुझाव पेश करने का इरादा रखता है। सऊदी नरेश के बेटे राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान के कथनानुसार सऊदी अरब के सैन्य ख़र्चों में वृद्धि और सुरक्षा चुनौतियों के कारण इस देश को आर्थिक समस्याओं का सामना है और इसके समाधान के लिए कुछ योजनाएं कार्यसूचि में हैं जिनमें से एक तेल की बड़ी कंपनी Aramco के कुछ शेयर को बेचना है। दो दिन पहले सऊदी नरेश के उत्तराधिकारी के आर्थिक सलाहकार मोहम्मद आले शैख ने कहा था कि अगर निकट भविष्य में देश आर्थिक संकट से निकलने के बारे में कुछ नहीं करता है तो उसे वर्ष 2017 से पहले ही पूर्णरूप से दिवालियेपन का सामना होगा। सऊदी सूत्रों के अनुसार इस देश में आर्थिक संकट इतना गहरा गया है कि इस देश के रक्षामंत्री मोहम्मद बिन सलमान ने 25 अप्रैल को घोषणा की है कि वह देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को पेश करेंगे। इस देश में आर्थिक सुधार कार्यक्रमों को पेश करने की बात ऐसे समय में की जा रही है जब सऊदी नरेश ने एक आदेश जारी करके जल व विद्दुत मंत्री अब्दुल्लाह बिन अब्दुर्रहमान अलहसीन को उनके पद से हटा दिया और सऊदी गृहमंत्री को उनका कार्यभार सौंप दिया है।

बहरहाल इस स्थिति में सऊदी अरब और क्षेत्र के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि सऊदी अरब में विभिन्न प्रकार के भ्रष्टाचार और क्षेत्र के देशों के आंतरिक मामलों में रियाज़ का सैनिक हस्तक्षेप इस देश में आर्थिक बदहाली का कारण बना है और इसी कारण सऊदी जनता ने हालिया वर्षों में कई बार प्रदर्शन करके आर्थिक और राजनीतिक सुधारों की मांग की है परंतु सऊदी अधिकारी कुछ ज़िम्मेदारों को हटाकर और कुछ योजनाएं पेश करके जनविरोधों को नियंत्रित करने की चेष्टा में हैं। MM