यमन के ख़िलाफ़ बिन सलमान का युद्ध कब तक जारी रहेगा?
यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के युद्ध ने सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को धराशायी कर दिया है जबकि यह देश यमन में अपना कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं कर सका है और यमनी न्यूनतम संभावनाओं के साथ भी अपने देश की रक्षा कर रहे हैं।
यमन के मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि सऊदी अरब के अंदर और उसकी सीमाओं के क़रीब कार्यवाही करने में यमनियों की एक विशेषता, युद्ध के दुष्परिणामों से सऊदी नागरिकों को दूर रखना है। वास्तव में यमनी बल नैतिक सिद्धांतों का पालन करते हुए आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाते। अगर यमनी बल चाहें तो नागरिक प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना उनके लिए सबसे आसान काम है, जैसा कि हमलावर सऊदी गठजोड़ यमन में शोकसभाओं, विवाह समारोहों, बाज़ारों और स्कूलों पर हमले करता है। यमनी बलों ने अपने गाइडेड मीज़ाइलों से सऊदी अरब के अंदर दूर दूर तक अहम व रणनैतिक लक्ष्यों को निशाना बनाया है लेकिन उनके हमलों में किसी भी असैनिक को कोई नुक़सान नहीं पहुंचा है।
सऊदी अरब ने यमन के ख़िलाफ़ जंग शुरू की थी और उसने यमन के लगभग हर इलाक़े पर बमबारी की है जिनमें हज़ारों यमनी नागरिक मारे गए हैं लेकिन यमनी बलों के हमलों में मरने या घायल होने वाले सऊदी नागरिकों के उसके पास कोई आंकड़े नहीं हैं क्योंकि इस युद्ध में कोई भी सऊदी नागरिक न तो घायल हुआ है और न ही मरा है। यह ऐसी स्थिति में है कि जब संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद और मानवाधिकार परिषद ने अपनी अनेक रिपोर्टों में सऊदी गठजोड़ के हमलों में बड़ी संख्या में यमनी नागरिकों के मारे जाने की पुष्टि की है। बहरहाल अब सऊदी अरब यमन के युद्ध में बुरी तरह फंस चुका है और वह जानता है कि इस जंग को जारी रखने का मतलब उसका राजनैतिक, सामरिक व नैतिक तौर पर तबाह हो जाना है।
टीकाकारों का कहना है कि यमन के ख़िलाफ़ सऊदी अरब के युद्ध को रोकने का फ़ैसला अमरीका के हाथ में है। यह लड़ाई बराक ओबामा के काल में शुरू हुई थी और जाॅन केरी की कोशिशों से शायद अमरीकी इस युद्ध को रोकना भी चाहते थे लेकिन सऊदी अरब नहीं माना क्योंकि ओबामा के राष्ट्रपति काल में सिर्फ़ कुछ महीने बचे थे। ट्रम्प के सत्ता में आने के बाद सऊदी अरब ने इस युद्ध को जारी रखा लेकिन जो बाइडन और डेमोक्रेटिक पार्टी के इरादे को परखने के लिए संभव है कि वह एक बार फिर युद्ध रोकने का विकल्प पेश करे। अलबत्ता सैन्य टीकाकारों का कहना है कि यमनी बलों की तरफ़ से जवाबी कार्यवाही जारी रहेगी और जब तक हमलावर सऊदी गठजोड़ अपने हमले और यमन का घेराव जारी रखेगा, यमनी जवाब देते रहेंगे।
यमनी नेतृत्व ने यह बात भी सिद्ध की है कि वह वार्ता के माध्यम से विवाद का समाधान करने के लिए तैयार है लेकिन यह सऊदी अरब है जो यमन में शांति नहीं चाहता। अगर दोनों पक्ष वार्ता की मेज़ पर आएं और सच्चाई के साथ बात करें और अपनी इच्छा शक्ति दिखाएं तो कुछ ही दिन में यह युद्ध बंद हो सकता है लेकिन सऊदी अरब इसे अपने लिए बेइज़्ज़ती समझता है। यमन युद्ध की जो ज़मीनी स्थिति है, उसे देखते हुए सऊदी अरब के लिए जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करना ही बेहतर होगा लेकिन सऊदी युवराज मुहम्मद बिन सलमान को शायद अमरीका के नए राष्ट्रपति के इशारे का इंतेज़ार है। (HN)
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