फ़ार्स की खाड़ी के देशों के इस्राईल से खुले संबन्ध
इस्राईल के साथ फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों के संबन्ध, कोई ढकी-छिपी बात नहीं है।
लंदन से अरबी भाषा में प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र अस्सफ़ीर ने शुक्रवार के अपने प्रकाशन में लिखा है कि फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों विशेषकर सऊदी अरब के इस्राईल से संबन्ध पुराने हैं। अस्सफ़ीर लिखता है कि विगत के विपरीत जब उनके संबन्ध मध्यस्त के माध्यम से हुआ करते थे, वर्तमान समय में यह संबन्ध ढके-छिपे नहीं हैं बल्कि स्पष्ट हैं।
इसी संदर्भ में अमरीकी समाचार एजेन्सी ब्लोमबर्ग ने जून 2015 में प्रकाशित लेख में लिखा था कि इस्राईल और सऊदी अरब के प्रतिनिधियों ने कम से कम 5 बार गोपनीय बैठकें की हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार इस्राईल और सऊदी अरब के बीच गोपनीय बैठकें सन 2014 से आरंभ हुईं जो भारत, इटली और चेक-गणराज्य में आयोजित हुईं। इन बैठकों में क्षेत्रीय परिवर्तनों, रियाज़ और तेलअवीव की संयुक्त चुनौतियों तथा ईरान से शत्रुता जैसे विषयों पर विचार विमर्श किया गया।
ब्लोमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार हालिया दिनों में इस्राईल और मिस्र के भी संबन्ध मज़बूत हुए हैं। इस्राईल के मआरियो समाचारपत्र के अनुसार मोसाद के प्रमुख, सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं। इसी प्रकार इस्राईल के एक राजनैतिक दल के नेता याईर लापीद ने न्यूयार्क में सऊदी अरब के शहज़ादे तुर्की फ़ैसल से भेंटवार्ता की जो पहले सऊदी अरब की गुप्तचर सेवा के प्रमुख रह चुके हैं। तुर्की फैसल ने इस्राईल के युद्धमंत्री मूशे यलऊन से भी भेंटवार्ता की है।
उधर 2016 के आरंभ में इस्राईल मे मूलभूत संरचना के मंत्री यूवाल इश्तायन्ज़ ने अबूधाबी की यात्रा की थी जहां पर उन्होंने संयुक्त अरब इमारात के अधिकारियों से भेंटवार्ताएं की थीं।
इसके अतिरिक्त ज़ायोनी शासन के कुछ उच्चाधिकारी, जार्डन नरेश अब्दुल्लाह द्वितीय और वहां के वरिष्ठ अधिकारियों से भेंटवार्ताएं करते रहे हैं।