तुर्की के पैरों के नीचे सऊदी अरब का केले का छिलका!
हालांकि पिछले कुछ बरसों में तुर्की व सऊदी अरब के संबंध काफ़ी तनावपूर्ण रहे हैं बल्कि कई मैदानों में दोनों ताल ठोंक का एक दूसरे के सामने भी आ गए थे लेकिन हालिया दिनों में कुछ ऐसी ख़बरें मिली हैं जिनसे पता चलता है कि रियाज़ ने अन्कारा से यमन युद्ध में शामिल होने का आग्रह किया है।
हालिया दिनों में कुछ ख़बरों में बताया गया है कि तुर्की के अधीन काम करने वाले तकफ़ीरी आतंकियों को सीरिया से यमन पहुंचा दिया गया है और इसी तरह तुर्की के ड्रोनों को यमन युद्ध में इस्तेमाल कर रहा है। अंसारुल्लाह संगठन के प्रवक्ता मुहम्मद अब्दुस्सलाम ने अलजज़ीरा से बात करते हुए कहा है कि रियाज़ ने यमन पर सैन्य हमले की शुरुआत में ही तुर्की से युद्धक विमान ख़रीदे थे और इसमें कोई नई बात नहीं है। सऊदी अरब हमेशा ही अन्य देशों से हथियार ख़रीदता है और वह ख़ुद किसी भी तरह की प्रगति में सक्षम नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह बात अहम नहीं है कि सऊदी अरब के हथियार, तुर्की से लिए गए हों, अमरीका से लिए गए हों या किसी भी अन्य देश से लिए गए हों क्योंकि इन युद्धक विमानों को यमन का एयर डिफ़ेंस मार गिराएगा। अब अगर तुर्की के समर्थन वाले तकफ़ीरी आतंकियों को सीरिया से यमन पहुंचाए जाने की बात सही हो तो कहा जा सकता है कि अन्कारा ने बड़ा रिस्क लिया है क्योंकि ख़ुद सऊदी अरब ने अमरीका से वादा किया था कि वह यमन युद्ध को दो हफ़्ते में ख़त्म कर देगा लेकिन अब ये युद्ध सातवें साल में प्रवेश करने वाला है और पिछले छः साल में न केवल यह कि उसने यमन के दसियों हज़ार नागरिकों की हत्या की है बल्कि अपने अरबों डाॅलर भी फूंक दिए हैं।
यमन युद्ध की शुरुआत में मिस्र के प्रख्यात विश्लेषक हसनैन हैकल ने सऊदी अरब को इस युद्ध के बारे में चेतावनी दी थी और कहा था कि यमन उसके लिए एक दलदल बन जाएगा। अब उनकी यह भविष्यवाणी पूरी हो गई है। मिस्र और पाकिस्तान जैसे देशों ने भी यमन युद्ध में साथ देने की सऊदी अरब की अपील को कभी स्वीकार नहीं किया और सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात इस युद्ध को जारी रखे हुए हैं।
बहरहाल यह बात स्पष्ट है कि अगर अमरीका या इस्राईल, यमन युद्ध में सऊदी अरब की मदद करते हैं तो इसमें उनके अपने लक्ष्य निहित हैं और साथ ही वे सऊदी अरब के अपराधों में सहभागी होंगे। यमन के इतिहास की जानकारी रखने वाले जानते हैं कि यह देश कभी भी अतिक्रमणकारियों के सामने नहीं झुका बल्कि हमेशा ही बड़ी शक्तियों के लिए दलदल में बदल गया, ऐसा दलदल जिससे आज तक कोई भी जीत कर बाहर नहीं निकला। (HN)
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