इस्राईल का स्वभाव समझना है तो यह लेख ज़रूर पढ़िए!
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पांच जुलाई 2019 को इस्राईल के अख़बार हाआरेट्ज़ में एक शोध रिपोर्ट प्रकाशित हुईः "एन क़बा का दफ़्न इस्राईल कैसे योजनाबद्ध रूप से 1948 में अरब आबादी को विस्थापित किए जाने के सुबूत मिटा रहा है"
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०१, २०२१ १२:२९ Asia/Kolkata
  • इस्राईल का स्वभाव समझना है तो यह लेख ज़रूर पढ़िए!

पांच जुलाई 2019 को इस्राईल के अख़बार हाआरेट्ज़ में एक शोध रिपोर्ट प्रकाशित हुईः "एन क़बा का दफ़्न इस्राईल कैसे योजनाबद्ध रूप से 1948 में अरब आबादी को विस्थापित किए जाने के सुबूत मिटा रहा है"

इस रिपोर्ट ने इतिहासकार बिरादरी को हिला कर रख दिया और एक बार फिर साबित हुआ कि सरकारें अपनी मर्ज़ी का इतिहास लिखवाने के लिए किस हद तक गिर जाती हैं।

रिपोर्ट के अनुसार 2015 में एक इस्राईली शोधकर्ता तमार नोविक ने इस्राईल की स्थापना के समय गठित होने वाली लेफ़्टिस्ट पार्टी मपाम के दस्तावेज़ों के भंडार तक पहुंच बना ली। वहां एक काग़ज़ पढ़कर उसके होश उड़ गए। उसमें लिखा था कि एसफ़ीद नामक क़स्बे के क़रीब एसफ़साफ़ गांव में 52 मर्दों को एक दूसरे से बांध कर खाई के किनारे खड़ा करके गोली मार दी गई। उनमें से दस अभी तड़प ही रहे थे मगर उन्हें दफ़्न कर दिया गया। औरतें और बच्चे रहम की भीख मांगते हुए रोते रह गए। कुल 61 लोगों को मारा गया। तीन महिलाओं का रेप हुआ। एक 14 साल की मुर्दा बच्ची की उंगली काट कर अंगूठी उतार ली गई।

1998 में इस्राईली ख़ुफ़िया संस्था मोसाद और शेनबेट के बहुत से पुराने दस्तावेज़ों की 50 साल की मुद्दत पूरी हो गई है। इस अवधि के बाद इन दस्तावेज़ों को इस्राईल के क़ानून के अनुसार इतिहासकारों के अध्ययन के लिए खोल दिया जाना चाहिए था मगर ख़ुफ़िया एजेंसियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना करके इन दस्तावेज़ों को अति संवेदनशील घोषित कर दिया और मांग की कि इन्हें सार्वजनिक न किया जाए बल्कि इनको ख़ुफ़िया रखने की मुद्दत 50 साल से बढ़ाकर 70 साल कर दी जाए। मंत्रिमंडल ने यह अवधि बढ़कर 90 साल कर दी।

नोट वरिष्ठ लेखक व टीकाकार वुसअतुल्लाह ख़ान के लेख का छोटा से भाग

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