कनाल इस्तांबुल, तुर्क राष्ट्रपति का ड्रीम प्रजेक्ट है या दीवानापन?
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तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने पर्यावरण और आर्थिक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं को दरकिनार करते हुए इस्तांबुल के निकट एक नहर परियोजना का उद्घाटन किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun २७, २०२१ १४:३० Asia/Kolkata
  • कनाल इस्तांबुल, तुर्क राष्ट्रपति का ड्रीम प्रजेक्ट है या दीवानापन?

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोआन ने पर्यावरण और आर्थिक प्रभावों से जुड़ी चिंताओं को दरकिनार करते हुए इस्तांबुल के निकट एक नहर परियोजना का उद्घाटन किया है।

शनिवार को अर्दोगान ने कहाः यह परियोजना क़ानूनी और वैज्ञानिक दोनों तरह से उपयुक्त है। "कनाल इस्तांबुल, शायद दुनिया में सबसे अधिक पर्यावरण के लिए अनुकूल परियोजनाओं में से एक है।"

इस परियोजना का विरोध करने वालों का कहना है कि क़रीब 15 अरब डॉलर की लागत वाली यह परियोजना, देश के समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को अधिक नुक़ासन पहुंचाएगी।

मई में तुर्की के परिवहन मंत्री करास्माइलोगलू ने कहा था कि कनाल के विस्तार के लिए अनुमानित 6 पुलों में से एक पुल के निर्माण पर लगभग 1.4 अरब डॉलर का ख़र्च आएगा।

शनिवार को हुर्रियत अख़बार के साथ इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कनाल इस्तांबुल परियोजना के पूरा होने में 6 साल लग जायेंगे और 12 साल में उसके राजस्व को कवर कर लिया जाएगा।

कनाल इस्तांबुल 45 किलोमीटर लंबी और 275 मीटर चौड़ी होगी, जो काला सागर को मरमरा सागर से जोड़ेगी। इस नहर से रोज़ाना 160 जहाज़ गुज़र सकेंगे। यह परियोजना अर्दोगान के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में जानी जाती है, जिसकी घोषणा उन्होंने क़रीब एक दशक पहले की थी।

कनाल परियोजना के मुख्य विरोधियों में से एक इस्तांबुल के मेयर इकराम इमामोग्लू का कहना है कि यह एक भ्रामक योजना है। वह इस एक दीवानापन क़रार देते हुए कहते हैं कि यह कोई सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि एक चुनावी परियोजना है।

द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस परियोजना पर 15 अरब डॉलर नहीं, बल्कि एक अंदाज़े के अनुसार, कम से कम 65 अरब डॉलर का ख़र्च आयेगा।

उद्घाटन समारोह में अर्दोआन ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट का बचाव करते हुए कहा कि दुनिया के सबसे व्यस्त जलमार्गों में से एक बोस्पोरस को इस नई नहर के बनने से काफ़ी राहत मिलेगी, और यह बोस्पोरस के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को बचाने के लिए भी ज़रूरी है।

तुर्क अधिकारियों का कहना है कि 1930 में बोस्पोरस से हर साल क़रीब तीन हज़ार जहाज़ गुज़रा करते थे, जिनकी संख्या अब 45 हज़ार हो गई है। 2050 तक यह संख्या क़रीब 78 हज़ार प्रति वर्ष हो जायेगी। msm