तालेबान ने बढ़ाया पाकिस्तान के साथ व्यापार, भारत को किया किनारे
अफ़ग़ानिस्तान के कई क्षेत्रों पर तालेबान के नियंत्रण के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान के बीच व्यापारिक लेनदेन एकदम से बढ़ गया है।
आनातोली समाचार एजेन्सी के अनुसार पाकिस्तान के कस्टम विभाग ने एलान किया है कि पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान की संयुक्त सीमा से सामान से भरे 475 ट्रक गुज़रे जबकि 17 अगस्त को इनकी संख्या 1123 हो गई। बताया जा रहा है कि अफ़ग़ानिस्तान तथा पाकिस्तान के बीच व्यापारिक लेनदेन में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। दूसरी ओर तालिबान ने अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण बनाने के साथ ही भारत के साथ व्यापार रोक दिया है।
तालिबान ने सत्ता पर क़ाबिज़ होते ही भारत के साथ आयात और निर्यात दोनों ही बंद कर दिया है। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद वहां से भारत के लिए होने वाला ड्राईफ्रूट का कारोबार बुरी तरह से बाधित हुआ है। इससे भारत में सूखे मेवे के दामों में वृद्धि हो गई है। अब आशंका यह जताई जा रही है कि आने वाले समय में भारत में ड्राईफ्रूट्स की कीमतें और भी बढ़ सकती है।
भारतीय निर्यात संगठन महासंघ के महानिदेशक डॉ. अजय सहाय ने कहा कि हम अफगानिस्तान में चल रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान से भारत के लिए आयात, पाकिस्तान के ट्रांजिट मार्ग के जरिये होता है जिससे देश में भारत से सामान की आवाजाही रुक गई है। तालिबान ने पाकिस्तान के लिए जाने वाले सभी कार्गो रोक दिए हैं।
एफआईईओ के महानिदेशक डॉ. सहाय के अनुसार भारत, अफगानिस्तान के बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। सन 2021 में नई दिल्ली से काबुल को अबतक लगभग 6262.5 करोड़ रुपये का सामान निर्यात किया जा चुका है। अफगानिस्तान से भारत में लगभग 3825 करोड़ रुपये का सामान आयातित हो चुका है।
मैत्री के कारण व्यापार के अलावा भारत ने अफगानिस्तान में बड़े पैमाने पर निवेश भी कर रखा है। अफ़ग़ानिस्तान में भारत की ओर से संचालित 400 से अधिक परियोजनाओं में तीन अरब डॉलर अर्थात लगभग 225 अरब रुपये का निवेश हुआ है।
एफआईईओ डीजी ने कहा कि भारत फिलहाल अफगानिस्तान को चीनी, दवाइयां, कपड़े, चाय, कॉफी, मसाले और ट्रांसमिशन टावर की सप्लाई करता है, जबकि अफ़ग़ानिस्तान से होने वाला अधिकतर आयात ड्राईफ्रूट्स का ही है। भारत लगभग 85 प्रतिशत सूखे मेवे अफगानिस्तान से आयात करता है।
ज्ञात रहे कि वैसे तो तालिबान ने ऐलान किया था कि वह भारत से अच्छे संबंध चाहता है इसलिए भारत यहां पर जारी अपने सभी कामों और निवेश को बिना किसी दिक्कत के पूरा कर सकता है।