जर्मनी में किसी भी दल को पूर्ण बहुमत नहीं
जर्मनी में रविवार को हुए नई संसद के लिए हुए मतदान के आए अनुमानित परिणामों में सोशल डेमोक्रेटिक सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है किंतु पूर्ण बहुत उसे नहीं मिल पाया है।
जर्मनी में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता दिखाई नहीं दे रहा है। माना जा रहा है कि इस देश में एक नई सरकार के सत्ता में आने के लिए गठबंधन को लेकर बातचीत हो सकती है जिसमें ग्रीन्स और लिबरल फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी के शामिल होने की संभावना है।
जर्मनी में रविवार को हुए नई संसद के लिए हुए मतदान के आए अनुमानित परिणामों में सोशल डेमोक्रेटिक सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। चुनाव परिणामों के अनुसार मार्केल की पार्टी सन 2005 के बाद इस चुनव में पहली बार सरकार का नेतृत्व करने की स्थिति में नहीं हैं। परिणामों के साथ एंजेला मार्केल की 16 साल के नेतृत्व वाला शासन समाप्त होने की कगार पर दिखाई दे रहा है।
चुनावी परिणामों में सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेटिक "एसपीडी" 25.5 प्रतिशत मतों के साथ सबसे आगे हैं। इसके बाद मार्केल के "सीडीयू"-"सीएसयू" कंजरवेटिव गठबंधन को 24.5 प्रतिशत वोट मिले हैं। जर्मनी के इन चुनावों में किसी भी राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलने की आशा बहुत कम है।
माना जा रहा है कि एक नई सरकार के सत्ता में आने के लिए गठबंधन को लेकर बातचीत होगी। इसमें ग्रीन्स और लिबरल फ्री डेमोक्रेटिक "एफडीपी" के शामिल होने की संभावना है। सोशल डेमोक्रेटिक के चांसलर उम्मीदवार ओलाफ स्कोल्ज ने अपने उत्साही समर्थकों से कहा कि निश्चित रूप से यह एक लंबी चुनावी शाम होने जा रही है।
पिछले 16 वर्ष से एंगेला मार्केल जर्मनी में सत्ता के शीर्ष पर काबिज रही हैं। वे चार बार जर्मनी की चांसलर चुनी गईं। हालांकि सन 2018 में उन्होंने घोषणा की थी कि वे अब पांचवीं बार चांसलर के पद के लिए मैदान में नहीं उतरेंगी।
इस चुनाव में एंगेला मार्केल की पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन "सीडीयू" की तरफ से आर्मिन लाशेत मैदान में हैं। वहीं, मार्केल सरकार के वित्त मंत्री व वाइस-चांसलर सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ओलाफ शोल्ज मुख्य विपक्षी के तौर पर मैदान में हैं।
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