आख़िर पुतीन ने नाटो को क्यों दी इतनी कड़ी चेतावनी?
रूस के राष्ट्रपति ने यूक्रेन में नाटो की सैन्य उपस्थिति और अमेरिकी समकक्ष के साथ पिछली बैठक पर प्रतिक्रिया दी है।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतीन ने हाल ही में जिनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ हुई मुलाक़ात और यूक्रेन में नाटो की सैन्य उपस्थिति के बारे में बात करते हुए कहा कि रूस और अमेरिका के आपसी संबंध को लेकर दोनों देशों की सरकारें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि हमारा व्यापार वर्तमान में 23 प्रतिशत बढ़ा है और यह जिनेवा शिखर सम्मेलन का प्रत्यक्ष प्रभाव है। पुतीन ने यूक्रेन में नाटो की सैन्य उपस्थिति को रूस के लिए ख़तरा बताते हुए कहा कि अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने यूक्रेन के नाटो में शामिल होने के मार्ग को प्रशस्त किया है।
रूसी मीडिया के अनुसार, पुतीन ने यूक्रेन में नाटो की सैन्य उपस्थिति को रूस के लिए एक गंभीर ख़तरा बताकर नाटो को एक कड़ा संदेश दे दिया है। ग़ौरतलब है कि रूसी राष्ट्रपति कई बार इस बात को कह चुके हैं कि यूक्रेन में किसी भी विदेश हस्तक्षेप को वह बर्दाशत नहीं करेंगे और जो भी रूस के लिए ख़तरा बनेगा मास्को उस ख़तरे को कैसे ख़त्म करे यह जानता है।
इस बीच रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाख़ारावा ने नाटो की ओर से रूस के आठ कर्मचारियों को ब्रसल्ज़ से निकालने और नाटो महासचिव जेन्स स्टोलटेनबर्ग के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अब नेटो को रूस के साथ अपने संबंधों के बारे में स्पष्ट करना होगा कि वह क्या चाहता है। वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने घोषणा की है कि नवंबर महीने के आरंभ से रूस ने नाटो के साथ अपने सभी कूटनायिक संबंधों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। उन्होंने बताया कि मास्को में मौजूद नाटो के कार्यालय को भी पूरी तरह बंद कर दिया गया है। याद रहे कि ब्रसल्ज़ में रूसी दूतावास के आठ कर्मचारियों के निकाले जाने से यह संकट अब दूसरा रूप ले सकता है। रूसी अधिकारियों ने एलान किया था कि ब्रसल्ज़ में रूसी कर्मचारियों के निकाले जाने का मास्को ज़रूर जवाब देगा। (RZ)
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