अब समझ में आया कि नहीं हो सकताः अमेरिका
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अमेरिका की उपविदेशमंत्री वेन्डी शेरमन ने कहा है  कि परमाणु वार्ता आरंभ होने से पहले वाशिंग्टन चाहता था कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम बंद हो जाये।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct २९, २०२१ ०८:०९ Asia/Kolkata
  • अब समझ में आया कि नहीं हो सकताः अमेरिका

अमेरिका की उपविदेशमंत्री वेन्डी शेरमन ने कहा है  कि परमाणु वार्ता आरंभ होने से पहले वाशिंग्टन चाहता था कि ईरान का यूरेनियम संवर्धन का कार्यक्रम बंद हो जाये।

वेंडी शेरमन ने एक साक्षात्कार में कहा कि अमेरिकी सरकार चाहती थी कि ईरान का यूरेनियम संवर्द्धन का कार्यक्रम ही बंद हो जाये परंतु पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की सरकार इस नतीजे पर पहुंची कि जो ज्ञान फैल चुका और अस्तित्व में आ चुका है उसे वापस नहीं लिया जा सकता।

उन्होंने अपने साक्षात्कार में उन अनुभवों को विस्तार से बयान किया है कि किस तरह परमाणु समझौता हुआ। उन्होंने अपने साक्षात्कार में कहा कि हमने ईरान के साथ परमाणु वार्ता आरंभ होने से वर्षों पहले कहा था कि अमेरिका ने समस्त आधिकारिक बैठकों में कहा था कि ईरान के पास यूरेनियम संवर्द्धन या इस प्रकार का कोई कार्यक्रम नहीं होना चाहिये। उन्होंने कहा कि यूरेनियम का संवर्धन एक वह तरीका है जिसके माध्यम से परमाणु पदार्थों को उस तापमान तक पहुंचाया जा सकता है जिससे उनका प्रयोग परमाणु हथियारों में किया जा सकता है।

वेंडी शेरमन ने कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा इस नतीजे पर पहुंच चुके थे कि जिस ज्ञान व तकनीक को लोगों ने सीख लिया है उसे भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपने साक्षात्कार के एक भाग में कहा कि परमाणु समझौता बहुत ही तकनीकी और जटिल समझौता है और मुझे विश्वास है कि बहुत से डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसदों व सिनेटरों ने उसे पढ़ा ही नहीं।  

जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका, जायोनी शासन और बहुत से पश्चिमी और ग़ैर पश्चिमी देश ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के इसलिए विरोधी हैं क्योंकि उन्हें बहुत अच्छी तरह पता है कि जो देश ज्ञान- विज्ञान की दृष्टि से जितना पीछे रहेगा उसे दबाना और उस पर अपनी वर्चस्वादी मांगों व इच्छाओं को थोपना उतना ही आसान रहेगा और अगर ईरान ने परमाणु तकनीक प्राप्त कर ली तो उस पर अपनी आधिपत्यवादी मांगों को थोपना और भी मुश्किल हो जायेगा।

दुनिया के साम्राज्यवादी देश और उनके पिछलग्गू बहुत अच्छी तरह जानते हैं कि जब ईरान के पास परमाणु तकनीक नहीं थी तब तो ईरान को दबा नहीं पाये तो अब ईरान को क्या दबा पायेंगे। इसलिए वे ईरान की प्रगति की रफ्तार को कम करने के लिए उसके विकास के मार्ग में हमेशा समस्यायें उत्पन्न करते- रहते हैं।

नोटः यह व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM

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