अफ़ग़ानिस्तान में दाइश के बढ़ते हमलों पर तालेबान की ख़ामोशी
काबुल में सैनिक अस्पताल के बाहर होने वाले विस्फोटों में 23 लोग मारे गए और 50 अन्य घायल हुए। यह विस्फोट काबुल के सुरक्षित माने जाने वाले क्षेत्र वज़ीर अकबर ख़ान में हुए जो डिप्लोमैटिक क्षेत्र है।
आतंकवादी गुट दाइश की ओर से काबुल के सैन्य अस्पताल सरदार मुहम्मद दाऊद ख़ान में किये गए हमलों के बाद अफ़ग़ानिस्तान में राष्ट्रसंघ के कार्यालय ने बयान जारी करके कहा है कि स्वास्थ्य कर्मियों और आम लोगों को निशाना बनाना मानवाधिकारों का हनन है।
दाइश की इस हालिया आतंकी कार्यवाही पर अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। तालेबान की ओर से दाइश से मुक़ाबले के दावों के बावजूद इस आतंकवादी गुट की ओर से अफ़ग़ानिस्तान में हालिया आतंकी कार्यवाहियों में वृद्धि हुई है। दाइश की आतंकी कार्यवाहियों को अब अफ़ग़ानिस्तान के लिए गंभीर ख़तरे के रूप में देखा जा रहा है।
पिछले सप्ताहों के दौरान अफ़ग़ानिस्तान के क़ुंदूज़ और क़ंधार में मस्जिदों में नमाज़ियों पर दाइश के हमलों के बाद तालेबान ने यह वादा किया था कि वह दाइश का मुक़ाबला करेगा। हालांकि दाइश द्वारा काबुल के सैन्य अस्पताल के बाहर किये गए विस्फोटों के बाद पता चलता है कि तालेबान अपने वचन में कितने पक्के हैं। दाइश के विध्वंसक हमलों का क्रम और उनको रोकने में तालेबान की अक्षमता के कारण उनके वादों पर ही सवाल उठने लगे हैं।
जानकारों का कहना है कि दाइश से मुक़ाबला करने के लिए तालेबान के पास किसी योजना का न होना, इस आतंकवादी गुट के सामने तालेबान की कमज़ोरी का परिचायक है। कई अवसरों पर तो दाइश ने सीधे तालेबान पर हमले किये हैं। अफ़ग़ानिस्तान विशेषकर काबुल में सुरक्षा स्थापित करने में तालेबान की अक्षमता के दृष्टिगत काबुल में पाकिस्तान के राजदूत ने इस देश में गृहयुद्ध की आशंका जताई है।
अफ़ग़ानिस्तान मे सत्ता के संचालन में केवल एक ही जाति विशेष को पेश करना और वहां पर अशांति के जारी रहने से इस बात का ख़तरा होता है कि दाइश से मुक़ाबल के बहाने अमरीका फिर अफ़ग़ानिस्तान कर रुख़ न कर ले।
अफ़ग़ानिस्तान के बारे में अमरीका के पूर्व विशेष दूत ज़लमेई ख़लीलज़ाद कहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान में अलक़ाएदा की ओर से ख़तरे की स्थिति में अमरीका, फिर इस देश पर हमला कर सकता है।
अफ़ग़ानिस्तान की वर्तमान परिस्थितियों के दृष्टिगत अगर तालेबान, अफ़ग़ानिस्तान के भीतर शांति एवं सुरक्षा को स्थापित नहीं कर पाए तो जहां एक ओर उनको वहां पर अशांति के कारण उत्पन्न होने वाली समस्याओं का मुक़ाबला करना पड़ेगा वहीं पर इस बात की कड़ी संभावना पाई जाती है कि अपने हितों को ख़तरे में पड़ता देखकर अमरीका फिर इस देश पर अपना नियंत्रण स्थापित करने लगे।
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