यूनान के तटीय इलाक़े शरणार्थियों की क़त्लगाह
https://parstoday.ir/hi/news/world-i107530-यूनान_के_तटीय_इलाक़े_शरणार्थियों_की_क़त्लगाह
.....यूनान के तटीय इलाक़े शरणार्थियों की क़त्लगाह बन गए हैं। रात के समय ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से चलने वाली नौकाओं पर सफ़र करने वाले वाले यात्री कभी समुद्र में डूब कर मर जाते हैं और कभी तट तक पहुंच जाने के बाद सर्दी की शिद्दत उनकी जान ले लेती है....महिलाएं और बच्चे भी उनमें शामिल हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २६, २०२१ १०:३१ Asia/Kolkata

.....यूनान के तटीय इलाक़े शरणार्थियों की क़त्लगाह बन गए हैं। रात के समय ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से चलने वाली नौकाओं पर सफ़र करने वाले वाले यात्री कभी समुद्र में डूब कर मर जाते हैं और कभी तट तक पहुंच जाने के बाद सर्दी की शिद्दत उनकी जान ले लेती है....महिलाएं और बच्चे भी उनमें शामिल हैं।

....एक युवा शरणार्थी अपनी विपदा सुनाते हुए कहते हैं कि अभी हम मंज़िल पर नहीं पहुंचे, हालत बहुत ख़राब है। मेरे बीवी बच्चे अब इस सर्दी को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं। हम पछता रहे हैं लेकिन वापसी का रास्ता नहीं है।....पिछले दिनों यूनान के तट के क़रीब नौका डूब जाने से एक दर्जन से अधिक शरणार्थियों की मौत हो गई। एक हफ़्ते के भीतर यह तीसरी घटना है। केवल 27 शरणार्थियों की लाशें मिल पाईं 60 शरणार्थी लापता हो गए।....एक शरणार्थी कहता है कि हमारा तो सफ़र अभी शुरू हुआ है। बहुत ख़तरनाक सफ़र है मुझे नहीं मालूम कि हमारा क्या अजाम होने वाला है। हालिया समय में तुर्की यूरोपीय देशों की ओर ग़ैर क़ानूनी पलायन का अहम मार्ग बन गया है। वर्ष 2021 आठ हज़ार से ज़्यादा शरणार्थियों के लिए घातक साल साबित हुआ। जो लोग जीवित बच गए हैं वह भी यूरोपीय देशों की सीमाओं पर बने शिविरों में हैं और उनके जीवन की कोई गैरेंटी नहीं है। अंकारा से आईआरआईबी के लिए हमीद कामेली की रिपोर्ट