उत्तरी कोरिया पर अमरीकी धमकियों का क्यों नही पड़ता कोई असर?
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अमरीका ने हाल ही में उत्तरी कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाए हैं जिसके जवाब में पियुंयांग ने मिसाइल के नए परीक्षण किये हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan १५, २०२२ २१:०८ Asia/Kolkata
  • उत्तरी कोरिया पर अमरीकी धमकियों का क्यों नही पड़ता कोई असर?

अमरीका ने हाल ही में उत्तरी कोरिया पर नए प्रतिबंध लगाए हैं जिसके जवाब में पियुंयांग ने मिसाइल के नए परीक्षण किये हैं।

उत्तरी कोरिया का कहना है कि अमरीका को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

उत्तरी कोरिया द्वारा दो दिन पहले मिसाइल परीक्षण करने के बाद अमरीका ने उसके विरुद्ध कुछ नए प्रतिबंध लगाए हैं।  उत्तरी कोरिया के मिसाइलों के परीक्षण का विरोध करते हुए अमरीका इससे पहले भी उसके विरुद्ध प्रतिबंध लगा चुका हैं लेकिन पियुंगयांग पर उसका कोई असर नहीं हुआ।  वह अमरीकी प्रतिबंधों की ओर से निश्चिंत अपनी सैन्य शक्ति को लगातार बढ़ाने के प्रयास में लगा हुआ है।

हालांकि ट्रम्प के सत्ताकाल में उत्तरी कोरिया के साथ संबन्ध सामान्य करने की दिशा में कुछ क़दम उठाए गए थे किंतु इस बारे में अमरीका के गंभीर न होने के कारण पियुंगयांग के साथ वाशिग्टन के संबन्ध सामान्य करने के प्रयास विफल रहे।

उत्तरी कोरिया के बारे में अमरीका इतना अधिक संवेदनशील है कि वह वहां के नेता की स्वास्थ्य स्थति तक पर गहरी नज़र रखता है।  इस बारे में राजनैतिक मामलों के जानकार वी नारेंग कहते हैं कि उत्तरी कोरिया के नेता की गतिविधियों पर अमरीका बहुत गहरी और निकट से नज़र रखता है।  शायह इस तरह से वह किम जांग ऊन को नियंत्रित करने के प्रयास में हो लेकिन उत्तरी कोरिया के नेता अमरीका की प्रतिबंधों की नीति से निडर होकर आए दिन मिसाइलों का परीक्षण करवाते हैं।

हक़ीक़त भी यही है कि कड़े प्रतिबंधों और अधिक दबाव की अमरीकी नीति का प्रभाव अब समाप्त हो गया है और यह उपयोगी नहीं रही है।  विशेषकर इसलिए कि अब अमरीका के पतन का आरंभ हो चुका है और यह बात अमरीका के भीतर से भी कही जाने लगी है।

अब जबकि अमरीका स्वयं को भीतर से कमज़ोर होता देख रहा है तो वह कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाकर तथा आधुनिक तकनीक से देशों को वंचित करके उनकी प्रगति में बाधाएं डाल रहा है। अमरीका की प्रतिबंधों की आदत के ही कारण कोरिया प्रायःद्वीप की सुरक्षा स्थति का जो हाल है उसको सभी जानते हैं।

उत्तरी कोरिया की आड़ में अमरीका, जापान और दक्षिणी कोरिया में अपनी सैन्य उपस्थिति का औचित्य दर्शाना चाहता है लेकिन विडंबना यह है कि इन देशों की जनता अपने यहां अमरीका की सैन्य उपस्थिति का खुलकर विरोध कर रही है।

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