यूक्रेन पर बर्लिन और वाशिगटन के बीच मतभेद गहराएः रिपोर्ट
https://parstoday.ir/hi/news/world-i108824-यूक्रेन_पर_बर्लिन_और_वाशिगटन_के_बीच_मतभेद_गहराएः_रिपोर्ट
वाशिगटन में जर्मनी के राजदूत ने बताया है कि अमरीका, जर्मनी को अविश्वसनीय सहयोगी मानता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २९, २०२२ १२:५१ Asia/Kolkata

वाशिगटन में जर्मनी के राजदूत ने बताया है कि अमरीका, जर्मनी को अविश्वसनीय सहयोगी मानता है।

जर्मनी की पत्रिका श्पेगल ने वाशिग्टन में जर्मनी के राजदूत Emily Haber इमेली हार्बर के हवाले से रिपोर्ट दी है कि उन्होंने जर्मनी विदेश मंत्रालय को एक गोपनीय पत्र भेजकर बताया है कि यूक्रेन के मुद्दे पर सहयोग न करने के कारण अमरीका अब जर्मनी को अविश्वसनीय सहयोगी बताया है।

उन्होंने यह भी लिखा है कि अमरीका यह मानता है कि रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों में जर्मनी ब्रेक के रूप में काम कर रहा है। एक अन्य बात यह है कि यूक्रेन हथियार भेजने में जर्मनी की ओर से रुकवाट ने भी अमरीकियों विशेषकर रिपब्लिकन्स को क्रोधित किया है।

हार्बर के अनुसार वाशिगटन में कहा जा रहा है कि जर्मनी यह काम रूस से सस्ती गैस हासिल करने के लिए कर रहा है।  जर्मनी के राजदूत का यह पत्र यूक्रेन को लेकर रूस के साथ व्यवहार के बारे में नेटो के दो सदस्य देशों के बीच गहरे मतभेद को दर्शाता है।

हालिया कुछ महीनों के दौरान अमरीका ने नेटो के साथ मिलकर इस बात को बारबार दोहराना आरंभ कर दिया है कि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है।  अपने इस दावे की आड़ में अमरीका, बड़ी संख्या में यूक्रेन के लिए हथियार भेज रहा है।  इस बारे में वाशिग्टन की तुलना में बर्लिन का दृष्टिकोण विरोधाभासी है।

अमरीका ने तो यूक्रेन को बड़ी संख्या में हथियार भेजे ही हैं साथ ही ब्रिटेन जैसे उसके सहयोगी देशों ने भी यूक्रेन को एंटी टैंक मिसाइल भेजे हैं।  इधर जर्मनी ने यूक्रेन मुद्दे पर नेटो के साथ देने का मौखिक दावा किया है और अमरीका के दबाव में हाल ही में घोषणा की है कि उसने एक मोबाइल हास्पिटल बनाया है और यूक्रेन के लिए 5000 हेलमेट भेजे हैं।  यूक्रेन के राष्ट्रपति ने इसका मज़ाक़ उड़ाया है।

इससे पहले जर्मनी ने अपनी वायुसीमा से यूक्रेन के लिए हथियार भेजने की अनुमति नहीं दी थी जिसका जर्मनी ने बचाव भी किया था।  एसा लगता है कि जर्मनी की गठबंधन सरकार, रूस के बारे में अमरीका तथा नेटो के साथ गंभीर मतभेद का शिकार हो गई है।  हालांकि जर्मनी की ओर से एलान किया जा चुका है कि रूस की ओर से यूक्रेन पर हमले की स्थिति में वह नोर्ड स्ट्रीम-2 गैस पाइप लाइन के संचालन की अनुमति नहीं देगा किंतु यूरोप अपनी गैस के प्रयोग में 40 प्रतिशत में रूसी गैस पर निर्भर है।

यूरोप में जारी कड़ाके की ठंड को देखते हुए इस फैसले का दुष्प्रभाव बहुत से यूरोपीय देशों की जनता और वहां के उद्योग पर पड़ेगा।  इसी संदर्भ में आस्ट्रिया के विदेशमंत्री ने कहा है कि यूक्रेन संकट में रूस की गैस को यूरोपीय संघ की प्रतिबंधों की सूचि में शामिल न किया जाए क्योंकि हमको रूसी गैस की बहुत ज़रूरत है।  एसा लग रहा है कि जैसे ट्रम्प के काल में वाशिग्टन और बर्लिन के बीच में मतभेद उभर आए थे, अब जो बाइडेन के काल में अधिक बढ़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर  पर हमें फ़ालो कीजिए