चीन के विदेशमंत्री की औचक अफ़ग़ानिस्तान यात्रा
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चीन के विदेशमंत्री वांग यी औचक यात्रा पर अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पहुंचे।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Mar २५, २०२२ ११:०२ Asia/Kolkata

चीन के विदेशमंत्री वांग यी औचक यात्रा पर अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पहुंचे।

काबुल में उन्होंने अपने प्रवास के दौरान तालेबान के नेताओं से विभिन्न मुद्दो पर चर्चा की।  अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा से पहले वांग यी, पाकिस्तान में इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए इस्लामाबाद गए थे।

चीन के विदेश मंत्री की औचक चीन यात्रा एसी स्थिति में हुई कि जब तालेबान अपनी सरकार को मान्यता दिलवाने के लिए हर स्तर पर हाथपैर मार रहे हैं।  इस विषय के दृष्टिगत वांग यी की अफ़ग़ानिस्तान यात्रा को विशेष महत्व दिया जा रहा है।  चीन का मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान से अमरीका की वापसी के बाद क्षेत्र में उसके लिए चेतावनियां कुछ कम हुई हैं किंतु वहां पर तालेबान द्वारा सत्ता संभालने के बाद से उसे अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद के विस्तार का ख़तरा भी लगा हुआ है।

यही कारण है कि हालिया कुछ सप्ताहों के दौरान चीन के अधिकारियों ने अफ़ग़ानिस्तान की वर्तमान स्थति पर चिंता जताते हुए तालेबान से आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष करने का आह्वान किया है।  चीन को आतंकी गुटों विशेषकर दाइश की ओर से ख़तरा है।  हो सकता है कि विश्व के एक शक्तिशाली देश के विदेशमंत्री की यात्रा तालेबान के लिए इस हिसाब से अच्छी हो कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उसकी ओर से की जाने वाली कार्यवाहियों को इससे बल मिले किंतु इसी के साथ यह यात्रा विश्व समुदाय का यह संदेश अपने साथ लिए हुए है कि अफ़ग़ानिस्तान में किसी एक गुट या दल की नहीं बल्कि एक व्यापक सरकार का गठन होना चाहिए।  एसी सरकार जो अफ़ग़ानिस्तान के हर वर्ग का प्रतिनिधित्व करती हो।

ओआईसी के सम्मेलन में चीन के विदेशमंत्री यह कह चुके हैं कि बीजिंग, अफ़ग़ानिस्तान की जनता के चयन का सम्मान करता है और इस देश में एक व्यापक सरकार के गठन का इच्छुक है। यह तालेबान के लिए स्पष्ट संदेश है कि विश्व समुदाय अफ़ग़ानिस्तान में एसी सरकार के गठन का इच्छुक है जो व्यापक हो और जिसको विश्व समुदाय का पूरा समर्थन हासिल हो।  हालांकि तालेबान विगत में कई बार चीन को अफ़ग़ानिस्तान का मित्र बता चुके हैं किंतु तालेबान की सरकार को मान्यता देने के लिए कुछ एसी चीज़ों की ज़रूरत है जो अभी तक व्यवहारिक रूप में दिखाई नहीं दे रही हैं।

चीन सहित विश्व के देशों का यह मानना है कि अफ़ग़ानिस्तान के लिए केवल एक विशेष विचारधारा के लोगों की सरकार का गठन उचित नहीं है अतः एसी सरकार को मान्यता हासिल नहीं हो पाएगी।  अगर तालेबान एसा नहीं करते हैं तो उनको विश्व स्तर पर मान्यता हासिल करने में कई प्रकार की रुकावटों का सामना करना होगा।

अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता संभाले हुए तालेबान को सात महीनों का समय हो चुका है।  इस दौरान  विश्व समुदाय द्वारा तालेबान की सरकार को मान्यता न दिया जाना इस बात को पूरी तरह से सिद्ध करता है कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर तालेबान को मान्यता उस समय मिलना संभव नहीं है जबतक वह विश्व समुदाय की मांग को मान नहीं जाता।

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