फ्रांस में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें
फ्रांस में नए श्रम क़ानूनों के ख़िलाफ़ पेरिस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं जिसमें दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
प्राप्त समाचारों के अनुसार नए श्रम क़ानूनों के ख़िलाफ़ यह प्रदर्शन ऐसे समय में हुआ है जब सरकार ने घोषणा की है कि वह संसद की पुष्टि के बिना ही श्रम के नए क़ानूनों लागू करना चाहती है।
फ्रांस की सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सैकड़ों लोगों ने पेरिस की सड़कों पर उतर कर मार्च किया और संसद भवन तक जाने की कोशिश की। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद प्रदर्शन ने हिंसक रूप धारण कर लिया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उन पर रबर की गोलियां चलाईं जिसके कारण दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हो गए।
ऐसा ही प्रदर्शन दक्षिणी फ्रांस के टूलूज़ शहर में भी किया गया जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दाग़े और लाठीचार्ज भी किया। इस मौक़े पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें भी हुईं। फ्रांस की 7 मज़दूर यूनियनों ने गुरुवार को पेरिस में एक बड़े प्रदर्शन की घोषणा की है। फ्रेंच युवा संगठन एफआईडीएल ने भी नए लेबर नियमों के ख़िलाफ़ हो रहे प्रदर्शनों के समर्थन की घोषणा की है।
उल्लेखनीय है कि अलख़मरी बिल के नाम से प्रसिद्ध नए श्रम क़ानूनों का यह बिल फ्रेंच श्रम मंत्री मरियम अलख़मरी ने पेश किया था जिसके ख़िलाफ़ काफी समय से प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
बिल के विरोधियों का कहना है कि नए श्रम क़ानूनों में व्यपारियों और कंपनियों को कर्मचारियों की छंटनी और काम के घंटे निर्धारित करने की खुली छूट दे दी गई है जिससे रोज़गार सुरक्षा को भारी जोखिम का सामना करना पड़ेगा।
जबकि फ्रांस सरकार का दावा है कि अलख़मरी बिल में व्यपारियों, कंपनियों और कर्मचारियों सहित सबके हितों का ध्यान रखा गया है और वह आपसी सहमति से काम के घंटे निर्धारित कर सकते हैं। (RZ)