अंतर्राष्ट्रीय इकानामी पर यूक्रेन जंग की काली छाया
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यूक्रेन जंग को एक महीने का समय बीत जाने के बाद इसके गंभीर आर्थिक प्रभाव साफ़ नज़र आने लगे हैं। बहुत से यूरोपीय देशों के लिए आर्थिक हालात कठिन हो गए हैं। जर्मनी में पिछले तीस साल का सबसे अधिक इनफ़्लेशन देखने में आ रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr ०३, २०२२ १०:०९ Asia/Kolkata

यूक्रेन जंग को एक महीने का समय बीत जाने के बाद इसके गंभीर आर्थिक प्रभाव साफ़ नज़र आने लगे हैं। बहुत से यूरोपीय देशों के लिए आर्थिक हालात कठिन हो गए हैं। जर्मनी में पिछले तीस साल का सबसे अधिक इनफ़्लेशन देखने में आ रहा है।

दूसरे यूरोपीय देशों पर भी यूक्रेन जंग का बहुत बुरा असर देखने में आ रहा है और महंगाई तेज़ी से बढ़ी है। यूरोपीय देशों में आर्थिक हालात और भी ख़राब हो सकते हैं। यूरो ज़ोन के 19 देशों में इनफ़्लेशन 5.9 प्रतिशत से बढ़कर 7.5 प्रतिशत हो गया है।

यूरोपियन सेंट्रल बैंक की प्रमुख क्रिस्टीन लागार्ड ने ताज़ा हालात के बारे में कहा कि यूरो ज़ोन में तीन कारणों से महंगाई बढ़ी है। जिनमें सबसे प्रमुख मुद्दा ऊर्जा की बढ़ी हुई क़ीमतें हैं।

ऊर्जा संकट यूरोप के लिए बहुत गंभीर विषय बन गया है। यूक्रेन में झड़पों की वजह से ऊर्जा की सप्लाई बाधित हुई है। इसके नतीजे में सारी दुनिया में गैस की क़ीमतें बढ़ी हैं।

रूस ने वर्ष 2021 में लगभग साढ़े 55 अरब डालर की गैस दुनिया के देशों को निर्यात की थी मगर अब युक्रेन जंग और रूस पर लगे प्रतिबंधों के कारण यह सप्लाई समस्याओं में पड़ गई है। रूस के राष्ट्रपति ने एलान किया है कि ग़ैर मित्र देशों से गैस की क़ीमत रूब्ल में वसूल की जाएगी। रूसी राष्ट्रपति के इस फ़ैसले से यूरोपीय देश बड़ी मुसीबत में फंस गए हैं।

जर्मन चांसलर ओलाफ़ शोल्ज़ ने कहा कि अगर रूस से गैस की सप्लाई पूरी तरह रुक जाती है तो जर्मनी को बहुत बुरे हालात का सामना करना पड़ेगा, देश के कुछ आर्थिक विभाग अपना उत्पादन पूरी तरह बंद कर देने पर मजबूर हो जाएंगे।

इंफ़्लेशन केवल यूरोपीय संघ नहीं बल्कि ब्रिटेन और अमरीका में भी बढ़ गया है और वहां भी कठिन आर्थिक हालात पैदा हो गए हैं। ब्रिटेन के ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि देश में मुद्रा स्फीति की दर तीस साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है। अधिकारियों का कहना है कि ब्रितानी कारख़ानों में बनने वाली चीज़ों की क़ीमतें बढ़ती जा रही हैं।

यह हालात तब हैं जब कुछ यूरोपीय देशों में राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। फ़्रांस की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मैरिन लोपेन ने ट्वीट किया है कि फ़्रांसीसियों को पैसों की ज़रूरत है।

अगर यूक्रेन में जंग जारी रहती है तो आर्थिक मुश्किलें लगातार बढ़ती जाएंगी।

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