इमरान ख़ान को सत्ता से हाथ क्यों धोना पड़ा?
पाकिस्तान में हफ़्तों से जारी राजनीतिक गतिरोध के बाद, शनिवार की रात नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव सफल रहने के बाद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान की सरकार का पतन हो गया।
शनिवार देर रात नेशनल असेंबली में इमरान ख़ान की सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग हुई जिसमें 174 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
इमरान ख़ान और उनकी पार्टी के नेताओं का कहना है कि अमरीका की नीतियों का विरोध करने और देश में अमरीकी सैन्य छावनियों के निर्माण की अनुमति नहीं देने के कारण उन्हें यह क़ुर्बानी देनी पड़ी है, जिसके लिए देश के विपक्षी दलों ने अमरीका और कुछ क्षेत्रीय देशों के साथ अलिखित समझौता कर लिया था। उनका कहना है कि रूस की यात्रा और स्वतंत्र विदेश नीति के कारण, उनकी सरकार के ख़िलाफ़ अमरीका के नेतृत्व में साज़िश रची गई थी।
2001 में अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीका के हमले के बाद से ही इस्लामाबाद, वाशिंगटन के साथ सैन्य सहयोग करता रहा है, लेकिन 2018 में इमरान ख़ान की पार्टी पाकिस्तान तहरीके इंसाफ़ के सत्ता संभालने के बाद अमरीका के साथ सहयोग में कमी देखी गई और कई अवसरों पर दोनों देशों के बीच तनाव काफ़ी बढ़ गया।
हाल ही में अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने और तालिबान के सत्ता संभालने के बाद, अमरीका ने इस्लामाबाद से कई सैन्य छावनियों को अपनी सेना के हवाले करने के लिए कहा था, ताकि तालिबान के ख़िलाफ़ पड़ोसी देश से सैन्य ऑप्रेशन किए जा सकें, लेकिन इमरान सरकार ने वाशिंगटन के इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया। इसीलिए उसी समय से ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि उनकी सरकार ख़तरे में है और व्हाइट हाउस ने उन्हें साइडलाइन करने के लिए योजना तैयार कर ली है।
इसके अलावा, सऊदी अरब भी इमरान सरकार को अपने हितों के लिए ख़तरा समझ रहा था, जिसकी वजह से रियाज़ ने उनकी सरकार को गिराने के लिए पाकिस्तान में अपने पुराने सहयोगियों की मदद की।
पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान रहे इमरान ख़ान 2018 में देश के प्रधानमंत्री बने थे और उन्होंने भ्रष्टाचार से लड़ने और अर्थव्यवस्था में सुधार का वादा किया था। सेना के सहयोग से सत्ता हासिल करने के आरोपों के बावजूद, कई मामलों में उनका सेना से टकराव भी देखा गया। बीते साल मार्च में उनकी पार्टी के कई नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी, जिसके बाद उनके लिए एक नया राजनीतिक संघर्ष शुरू हो गया था।
इमरान ख़ान बार-बार ये आरोप लगाते रहे हैं कि देश का विपक्ष विदेशी ताकतों के साथ मिल कर काम कर रहा है। उनका कहना है कि रूस और चीन के मामले में उन्होंने अमरीका के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्हें सत्ता से निकालने के लिए अमरीका के नेतृत्व में साज़िश रची गई। msm