क्या यूरोप ने रूसी ऊर्जा का विकल्प खोज लिया है?
रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी रहने के कारण, रूस से यूरोप के लिए ऊर्जा की आपूर्ति एक बड़ी समस्या बनती जा रही है। कई यूरोपीय देशों का मानना है कि रूस से तेल और गैस की आपूर्ति बंद करना मॉस्को के ख़िलाफ़ एक महत्वपूर्ण हथियार होगा, तो वहीं कुछ दूसरे देश इससे सहमत नहीं हैं।
यूरोपीय कमीशन में घरेलू बाज़ार के कमिश्नर थिएरी ब्रेटॉन का कहना है कि रूस से यूरोप के लिए गैस की आपूर्ति बंद करने की योजना तैयार कर ली गई है, लेकिन इस योजना को रातो रात लागू नहीं किया सकता है और रूस पर यूरोप की निर्भरता को कम करने में समय लगेगा।

24 फ़रवरी को रूस ने स्पेशल सैन्य ऑप्रेशन का नाम देकर यूक्रेन पर व्यापक सैन्य चढ़ाई कर दी थी, जिसके बाद अमरीका और यूरोपीय देशों ने मॉस्को के ख़िलाफ़ व्यापक आर्थिक युद्ध छेड़ने का एलान किया और उसके ख़िलाफ़ इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध लगा दिए।
इस बीच, रूस के उप प्रधानमंत्री एलेक्ज़ेंडर नोवाक का कहना है कि रूसी तेल प्रतिबंधित करने का फ़ैसला वैश्विक बाज़ार पर भयानक असर डालेगा और ऐसा नहीं लगता है कि अगले पांच से दस वर्षों तक यूरोप, रूसी तेल और गैस का विकल्प तलाश कर सकता है।
रूस, अमरीका और सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक देश है। दुनिया के कुल तेल सप्लाई का 8-10 फ़ीसदी रूस से ही आता है। रूस हर रोज़ 40 से 50 लाख बैरल कच्चा तेल और सालाना 8,500 अरब क्यूबिक फ़ीट प्राकृतिक गैस निर्यात करता है। इसमें से ज़्यादा हिस्सा यूरोप के हिस्से में जाता है। रूस यूरोपीय संघ को 40 फ़ीसदी गैस और 30 फ़ीसदी तेल निर्यात करता है, अगर यूरोप के लिए यह सप्लाई बंद होती है तो इसका विकल्प खोजना, आसान नहीं होगा।
वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में रूस की महत्वपूर्ण भूमिका होने के कारण अमरीका और यूरोपीय संघ अभी भी रूस के तेल और गैस उद्योग पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगा पाए हैं। जर्मन चांसलर ओलाफ़ शॉल्ट्ज़ ने रूस के तेल और गैस पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने के विचार को ख़ारिज कर दिया था। उन्होंने कहा था कि यूरोप ने रूसी ऊर्जा को प्रतिबंधों से जानबूझ कर छूट दी है, क्योंकि इस समय इसका कोई विकल्प मौजूद नहीं है। यूरोप के देशों को तेल के मुक़ाबले गैस की ज़रूरत सबसे ज़्यादा होती है और यूरोपीय संघ अपनी गैस का 61 फ़ीसदी आयात करता है, जिसमें से 40 फ़ीसदी गैस रूस से ही आती है। रूस ने अगर यूरोप को गैस की सप्लाई बंद कर दी तो इटली और जर्मनी पर इसका सबसे ज़्यादा असर पड़ेगा।
ऐसा लगता है कि रूस पर आर्थिक दबाव डालने में पश्चिमी देशों की राय बंटी हुई है और हर देश अपने राष्ट्रीय हितों के बारे में सोच रहा है। क्योंकि ऊर्जा की क़ीमतों में वृद्धि, मंहगाई में वृद्धि का कारण बनेगी और इसके गंभीर राजनीतिक और सामाजिक परिणाम निकल सकते हैं। msm