शहबाज़ शरीफ़ की सरकार का झुकाव है किस तरफ़?
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अमरीका और पाकिस्तान के विदेशमंत्रियों ने अफ़ग़ानिस्तान के परिवर्तनों सहित कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०८, २०२२ ०७:३६ Asia/Kolkata
  • शहबाज़ शरीफ़ की सरकार का झुकाव है किस तरफ़?

अमरीका और पाकिस्तान के विदेशमंत्रियों ने अफ़ग़ानिस्तान के परिवर्तनों सहित कई मुद्दों पर विचार विमर्श किया है।

एंटनी ब्लिंकन और बिलावल भुट्टो ने टेलिफोनी वार्ता में वाशिग्टन तथा इस्लामाबाद के बीच सहयोग के बारे में भी विस्तार से चर्चा की।  बिलावल भुट्टो का कहना है कि इस्लामाबाद और वाशिग्टन के बीच परस्पर सम्मान के आधार पर संबन्धों के विस्तार पर सहमति बनी है।

पाकिस्तान और अमरीका के विदेशमंत्रियों के बीच टेलिफोनी वार्ता एसी स्थति में हुई है कि जब पाकिस्तान में यह कहा जा रहा है कि इमरान ख़ान की सरकार को गिराने में विदेशी अर्थात अमरीका का हाथ रहा है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने अपने एक संबोधन में क्षेत्र में अमरीका की नीतियों की भर्त्सना की।  उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की जनता कभी भी अमरीकी नीतियों का अनुसरण नहीं करेगी।  इमरान ख़ान का कहना था कि अपने भविष्य का निर्धारण हम स्वयं करेंगे।  वे इस बात को पहले ही कह चुके हैं कि पाकिस्तान की सत्ता से उन्हें अलग करने में अमरीका द्वारा केन्द्रित षडयंत्र था जिसका विपक्षी दलों ने समर्थन किया।  इमरान ख़ान के कथनानुसार वे अमरीकी नीतियों का विरोध करने के कारण बलि का बकरा बने हैं।

शायद यही वजह है कि पाकिस्तान में विपक्षी दलों की सहायता से बनने वाली सरकार को जनता का कोई विशेष समर्थन हासिल नहीं है।  इसी विषय के दृष्टिगत मुस्लिम लीग नवाज़ और पीपल्स पार्टी को सत्ता में बने रहने के लिए निश्चित रूप में विदेशी शक्ति के समर्थन की ज़रूरत रहेगी।  इसीलिए पाकिस्तान की संसद में जब शहबाज़ शरीफ़ को इस देश के प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया तो उन्होंने मीडिया से बात करते हुए सभी क्षेत्रों में अमरीका के साथ संबन्धों में विस्तार को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताया।

पाकिस्तान के नए विदेशमंत्री द्वारा इसी बात को अपने अमरीकी समकक्ष के साथ वार्ता में दोहराने से पता चलता है कि अमरीका के संदर्भ में इस्लामाबाद की नीति परिवर्तित हुई है।  इमरान ख़ान के सत्ताकाल में इस बात पर बल दिया जाता था कि क्षेत्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की नीति स्वतंत्र होगी जिसका अमरीका से कोई लेना-देना नहीं होगा।

इमरान ख़ान की सरकार ने पाकिस्तान की सेना की कुछ छावनियों को अमरीका के हवाले करने से इन्कार कर दिया था जिससे इस्लामाबाद और वाशिगंटन के संबन्धों में तनाव आ गया था।  अब अमरीका के बारे में शहबाज़ शरीफ की नई सरकार द्वारा अपनाई जाने वाली नीतियां, पाकिस्तान के आगामी फैसलों को अधिक स्पष्ट करेंगी।

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