नफ़रत की महामारी ने पूरे अमरीकी समाज को जकड़ लिया है
https://parstoday.ir/hi/news/world-i112772-नफ़रत_की_महामारी_ने_पूरे_अमरीकी_समाज_को_जकड़_लिया_है
शनिवार को न्यूयॉर्क के बफ़ेलो सुपरमार्केट में एक श्वेत लड़के ने फ़ायरिंग करके 10 लोगों हत्या कर दी। मरने वालों में 8 लोग अश्वेत थे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १६, २०२२ ०८:०५ Asia/Kolkata
  • नफ़रत की महामारी ने पूरे अमरीकी समाज को जकड़ लिया है

शनिवार को न्यूयॉर्क के बफ़ेलो सुपरमार्केट में एक श्वेत लड़के ने फ़ायरिंग करके 10 लोगों हत्या कर दी। मरने वालों में 8 लोग अश्वेत थे।

इसके एक दिन बाद ही रविवार को ताइवानी मूल के लोगों के एक चर्च में गोलीबारी की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और पांच अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।

इस नरसंहार के बाद अमरीका की उप राष्ट्रपति कमला हैरिल ने कहाः आजकल अमरीका में हम नफ़रत की महामारी फैलते हुए देख रहे हैं।

हालांकि अगर अमरीका के 240 साल के इतिहास पर नज़र डालें तो साफ़ हो जाएगा कि सिर्फ़ आजकल ही नहीं, बल्कि इस देश में नफ़रत का हमेशा से ही बोलबाला रहा है। इस नफ़रत के कई रूप रहे हैं, कभी कालों के ख़िलाफ़ गोरों की नफ़रत तो कभी गोरों के ख़िलाफ़ कालों की नफ़रत, कभी रेड इंडियंस के ख़िलाफ़ गोरों और कालों की नफ़रत तो कभी गोरों और कालों के ख़िलाफ़ रेड इंडियंस की नफ़रत। इसके अलावा, अमरीका में लैटिन नागरिकों की जनसंख्या बढ़ने के साथ ही इस त्रिकोणीय नफ़रत ने अब चार कोणीय रुख़ ले लिया है।

इसके अलावा, अमरीका में नफ़रत की महामारी सिर्फ़ जाति और रंग के आधार पर ही नहीं है, बल्कि विचारधाराओं के टकराव ने भी इस देश में एक गंभीर रूप ले लिया है। ईश्वर पर भरोसा करने वाले ईश्वर पर विश्वास नहीं रखने वालों से टकरा रहे हैं, प्रोटेस्टेंट कैथोलिकों के सामने खड़े हुए हैं और ईसाई, मुसलमानें के मुक़ाबले में खड़े हो गए हैं।

इस बीच, अमरीका में ग़रीबों और अमीरों के बीच की खाई भी दिन ब दिन अधिक गहरी होती जा रही है। इस देश में जहां सिर्फ़ एक शख़्स के पीस 250 अरब डॉलर की संपत्ति है, वहीं 40 मिलियन लोग ग़रीबी की रेखा के नीचे गुज़र बसर कर रहे हैं, जो पूरी तरह से सरकारी मदद पर आश्रित हैं।

यह तमाम समस्याएं एक ऐसे देश में हैं, जहां एक किताब ख़रीदने से ज़्यादा आसान ख़तरनाक से ख़तरनाक हथियार ख़रीदना आसान है। यही वजह है कि जो लोग किसी भी वजह से परेशान होते हैं या समाज में मौजूद समस्याओं के कारण मानसिक तनाव का सामना कर रहे होते हैं, हथियार उठाकर लोगों को निशाना बनाना शुरू कर देते हैं, चाहे वह किसी चर्च में हों, मस्जिद में हों, स्कूल में हों या स्टेशन पर।

शनिवार को एक सुपरमार्केट में निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारने वाले गोरे लड़के ने अपनी बंदूक़ पर उस गोरी महिला का नाम लिखा हुआ था, जिसकी मौत पिछले साल कालों के हिंसक प्रदर्शनों के दौरान हो गई थी। इससे पता चलता है कि अमरीकी समाज में नफ़रत की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।