हथियारों की बिक्री रोककर फ्रांस मानवाधिकारों की सुरक्षा करे
फ्रांसीसी मानवाधिकार संगठनों ने इस देश के राष्ट्रपति से यूएई को हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की है।
फ्रांस के कई मानवाधिकार संगठनों ने राष्ट्रपति मैक्रां से मांग की है कि वे संयुक्त अरब इमारात को हथियार बेचने पर प्रतिबंध लगाएं।
इन संगठनों ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति से यह भी मांग की थी कि यूएई के शासक मुहम्मद बिन ज़ाएद के साथ मुलाक़ात में वे इस विषय पर चर्चा करें और मानवाधिकार संगठनों की आपत्ति से उनको अवगत करवाएं।
इंटरनैश्नल फेडरेशन आफ ह्यूमन राइट्स, ह्यूमन राइट्स यूनियन तथा फार्स की खाड़ी मानवाधिकार केन्द्र ने एक खुला ख़त जारी करके इस बात के प्रति अपनी चिंता व्यक्त की है कि हथियारों के प्रयोग से होने वाले मानवाधिकारों के हनन से हम चिंतित हैं अतः इसको तत्काल रुकवाया जाए।
फ्रांस के राष्ट्रपति जब संयुक्त अरब इमारात की यात्रा पर गए थे तो उन्होंने 80 राफाएल युद्धक विमानों और 12 सैन्य हैलिकाप्टरों को बेचने का समझौता यूएई के साथ किया था। हथियारों के इस सौदे का बड़े पैमाने पर विरोध किया गया था।
जिन संगठनों और संस्थाओं ने इसका विरोध किया था उनका कहना था कि फ़्रांस के हथियार यमनवासियों के विरुद्ध भी प्रयोग किये जा रहे हैं जो मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। हालांकि फ्रांस इस बात के प्रति कटिबद्ध है कि उनको हथियार सप्लाई नहीं करेगा जिनके माध्यम से हथियारों का प्रयोग करके मानवाधिकारों का हनन होता हो।
याद रहे कि यमन के विरुद्ध युद्ध मे यूएई, सऊदी अरब का घटक है। इस युद्ध में सऊदी गठबंधन खुलकर मानवाधिकारों का हनन कर रहा है।
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