भारत और रूस ने बाहर का रास्ता दिखाया डाॅलर को
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अपने द्विपक्षीय व्यापार के लेनदेन में भारत और रूस दोनों ने डालर को हटा दिया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २७, २०२२ १२:३६ Asia/Kolkata

अपने द्विपक्षीय व्यापार के लेनदेन में भारत और रूस दोनों ने डालर को हटा दिया है।

ब्रिक्स के प्रमुख ने घोषणा की है कि भारत और रूस को परस्पर व्यापार में अब डाॅलर की ज़रूरत नहीं है।

पूर्णनिमा आनंद के अनुसार नई दिल्ली और माॅस्को ने लेनदेन के लिए अपनी मुद्राओं के प्रयोग को वरीयता दी है।  आनंद ने कहा कि व्यापारिक लेनदेन में हमने रूबल और रुपये के प्रयोग को शुरू कर दिया है एसे में हमको आपसी व्यापार में अमरीकी डाॅलर की कोई ज़रूरत बाक़ी नहीं बची है।  रूस और चीन के बीच व्यापार में भी डाॅलर को हटाकर रुबल और यूवान के इस्तेमाल की बात चल रही है।

अगस्त 2022 के आरंभ में मिलने वाले सीमा शुल्क के आंकड़े बताते हैं कि भारत की बहुत सी कंपनियां अपने डाॅलरों को एशियन मुद्रा विशेषकर यूवान में बदल रहे हैं।  यह कंपनियां, अन्य मुद्राओं का प्रयोग करके, माॅस्को पर लगे पश्चिम के प्रतिबंधों से स्वयं को अधिक से अधिक सुरक्षित रखना चाहती हैं।  भारत की बहुत सी स्टील और सीमेंट की कंपनियां रूस से कोयला ख़रीदने के लिए दिरहम, यूवान, हाॅंगकांग के डाॅलर और यूरो में व्यापार कर रही हैं।

भारत ने यूक्रेन युद्ध के आरंभ होने के बाद से रूस से तेल और पत्थर के कोयले की ख़रीद में उल्लेखनीय वृद्धि कर दी है।  इसी विषय ने रूस को पश्चिमी प्रतिबंधों के नकारात्मक प्रभावों से किसी सीमा तक बचा लिया है।  इस संदर्भ में पूर्निमा आनंद कहते हैं कि नई दिल्ली  यूक्रेन युद्ध में स्वयं को तटस्थ मानती है और पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव के बावजूद, जब भी ज़रूरत होगी माॅस्को के साथ सहयोग किया जाएगा।

रूस की सरकार ने इस देश की केन्द्रीय बैंक, सरकारी पूंजी निवेश कोष, विभिन्न बैंकों और कई व्यापारियों को डाॅलर में व्यापार करने से रोक दिया है।  यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिम ने रूस के विरुद्ध कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए उसके बाद से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर व्यापार के लिए मुद्रा के लिए डाॅलर के विकल्प के रूप में किसी दूसरी मुद्रा को अपनाने की बात सामने आई।

सन 2014 में क्रीमिया के रुसी संघ में विलय के विषय पर अमरीका ने रुस के विरुद्ध प्रतिबंध लगाए थे।  इन प्रतिबंधों के बाद उन रूसी कंपनियों के लिए समस्याएं आने लगी थीं जो डाॅलर में व्यापार किया करती थीं।  उसी समय से रूस ने अमरीकी मुद्रा डाॅलर से अपनी निर्भर्ता कम करनी शुरू कर दी थी।

रूस की केन्द्रीय बैंक ने अपने विदेशी मुद्रा भण्डार में डाॅलर को कम करके उसके स्थान पर सोना, यूवान और यूरो को बढ़ा दिया था।  अब रूस ने विदेशी लेनदेन में डाॅलर को हटाकर राष्ट्रीय मुद्रा में व्यापार का फैसला कर लिया है।

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