पाकिस्तान की उम्मीद पर खरा नहीं उतर रहा है अमरीका
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पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने परस्पर विश्वास और सम्मान के आधार पर इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच रचनात्मक बातचीत का आह्वान किया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep ०८, २०२२ १०:२० Asia/Kolkata

पाकिस्तान के प्रधान मंत्री ने परस्पर विश्वास और सम्मान के आधार पर इस्लामाबाद और वाशिंगटन के बीच रचनात्मक बातचीत का आह्वान किया।

इस्लामाबाद में अमरीकी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी करने वाले शाहबाज़ शरीफ़ ने आपसी सम्मान, विश्वास और समझ के आधार पर दोनों देशों के बीच रचनात्मक और स्थायी बातचीत की आवश्यकता पर ज़ोर दिया।

पाकिस्तान के प्रधान मंत्री कार्यालय ने इस्लामाबाद में अमरीकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ की बैठक के बारे में एक बयान जारी किया। इस बैठक में शहबाज़ शरीफ़ ने अफ़ग़ानिस्तान के हालात सहित द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय विकास की समीक्षा करते हुए अमरीका के ग़ैर-रचनात्मक बर्ताव की आलोचना की।

शाहबाज़ शरीफ़ के शब्दों में पाकिस्तान के प्रति अमरीका के बर्ताव की परोक्ष आलोचना की गयी है और इस्लामाबाद के प्रति वाशिंगटन के ग़ैर-रचनात्मक दृष्टिकोण के कारण आपसी सम्मान और विश्वास की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया है।

शाहबाज़ शरीफ़ को जो पाकिस्तानी संसद के वोट से इमरान ख़ान को हटाने के बाद अप्रैल 2022 में पाकिस्तान के प्रधान मंत्री बने, उम्मीद थी कि अमरीका की मदद से पाकिस्तान के मामलों का प्रशासन संभाल सकते हैं।

पिछले अप्रैल के महीने में पाकिस्तान की संसद द्वारा प्रधान मंत्री का पद ग्रहण करने के लिए मतदान के पहले घंटों में ही उन्होंने अमरीका के साथ संबंध विकसित करने के लिए अपनी विदेश नीति की प्राथमिकता की घोषणा की थी।

शाहबाज़ शरीफ को पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के रूप में सत्ता में आए लगभग पांच महीने बीत चुके हैं, न केवल पाकिस्तान के साथ संबंधों को विकासित करने में अमेरिका की इच्छा का कोई संकेत नहीं मिला है, बल्कि वाइट हाउस के कार्यक्रमों के बारे में इस्लामाबाद के प्रदर्शन की भी आलोचना हुई है।

पाकिस्तान में कई आर्थिक समस्याओं का सामना कर रहे शाहबाज़ शरीफ को उम्मीद थी कि इमरान खान के जाने से अमरीकी सरकार उनके देश के प्रति नया रुख़ अपनाएगी।

इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधान मंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान या विपक्ष में रहते हुए हमेशा ही पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान के प्रति अमरीका की योजनाओं की आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखते थे।

इस कारण से, इमरान खान के पाकिस्तान सरकार के प्रमुख के रूप में चार साल के कार्यकाल के दौरान, अमेरिका के साथ देश के संबंध अच्छे नहीं थे। (AK)

 

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