अफ़ग़ानिस्तान पर अमरीकी हमले की सालगिरह
अफ़ग़ानिस्तान पर अतिग्रहण के दौरान अमेरिका और नाटो के सैनिकों ने बहुत अपराध अंजाम दिये।
दोस्तो सात अक्तूबर वर्ष 2001 को अमेरिका और उसके घटकों ने आतंकवाद से मुकाबले के बहाने अफगानिस्तान पर हमला किया था और उसके बाद अमेरिका और उसके घटकों ने लगभग दो दशकों तक अफगानिस्तान का अतिग्रहण किये रखा। इस दौरान अमेरिका और नाटो के अतिग्रहणकारी सैनिकों ने बहुत अपराध अंजाम दिये। आधिकारिक तौर पर जो आंकड़े प्रकाशित हुए हैं उसके अनुसार अमेरिका के अतिग्रहणकारी सैनिकों ने 71 हज़ार अफगानिस्तान के आम नागरिकों की हत्या की जबकि प्रतीत यह हो रहा है कि यह संख्या इससे बहुत अधिक है। क्योंकि अमेरिका और पश्चिमी हल्कों की ओर से खबरों के प्रकाशन पर भारी सेंसर था। इसके बावजूद स्वतंत्र संचार माध्यमों व संयुक्त राष्ट्रसंघ के स्रोतों की ओर से जो रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं उन्हें देखकर दो दशकों के अतिग्रहण के दौरान अमेरिका ने जो अपराध अफगानिस्तान में अंजाम दिये हैं उनकी गहराई का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।
अफगानिस्तान के एक टीकाकार मौलवी मुफलेह इस बारे में कहते हैं कि अमेरिका ने आतंकवाद से मुकाबले और शांति स्थापित करने के बहाने अफगानिस्तान पर हमला करके उसका अतिग्रहण कर लिया। यह उस स्थिति में है जब गत दो दशकों के दौरान खुद अमेरिका अफगानिस्तान में आतंकवाद और अपराध के फलने- फूलने के सबसे बड़े कारण में परिवर्तित हो गया और यही अमेरिकी सैनिकों की उपस्थिति की उपलब्धि रही है।
अमेरिकी सैनिक 20 वर्षों तक अफगानिस्तान में मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने कलस्टर और फास्फोरस बमों सहित विभिन्न प्रकार के खतरनाक हथियारों का प्रयोग किया जिसके दुष्परिणामों को अफगानिस्तान की जनता और भावी पीढ़ियां भी झेलेंगी। यह अमेरिकी सैनिकों के अनगिनत अपराधों का मात्र एक भाग है। अफगानी लोगों के घरों में रातों को सोते समय अमेरिकी सैनिकों का घुस जाना और बहुत से लोगों को गिरफ्तार करके उन्हें निजी जेलों में रखकर प्रताड़ित करना अमेरिकी सैनिकों की दिनचर्या हो गयी थी और अमेरिकी और नाटो सैनिकों की ओर से यह मानवाधिकार का खुला हनन था। अफगानिस्तान के एक प्रोफेसर अब्दुल लतीफ नज़री इस बारे में कहते हैं कि अमेरिकी अफगानी राष्ट्र के निर्माण के लिए यहां नहीं आये थे बल्कि उनका लक्ष्य क्षेत्र की जासूसी के लिए अफगानिस्तान को अपने अड्डे में परिवर्तित करना था इसी कारण उन्होंने अफगानिस्तान के लोगों की स्थिति को बेहतर करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया और जो बचा है वह एक खंडहर से अधिक कुछ और नहीं है।
बहरहाल सात अक्तूबर का दिन अमेरिका और नाटो के अफगानिस्तान पर हमले, अतिग्रहण और अनिगनत अपराधों की याद का दिन है। यह वह दिन है जिस दिन न केवल अफगानिस्तान बल्कि क्षेत्रीय देशों की जनता के लिए बहुत सी समस्याओं के आरंभ होने का दिन था। अमेरिका और नाटो के सैनिकों को अफगानिस्तान से गये हुए एक वर्ष का समय बीत रहा है परंतु इस देश की जनता को जिन समस्याओं व कठिनाइयों का सामना है उनमें से बहुत सी समस्याओं की जड़ अमेरिकी अतिग्रहण है और प्रतीत नहीं हो रहा है कि दुनिया की किसी भी अदालत में अमेरिकी और नाटो सैनिकों के अपराधों के खिलाफ मुकद्दमा चलाया जायेगा। बहुत से जानकार हल्कों का मानना है कि मानवाधिकारों का हनन जितना अधिक पूरी दुनिया में अमेरिका करता है उतना दुनिया का शायद ही कोई देश करता हो। अफगानिस्तान, इराक, यमन और सीरिया जैसे देशों में अमेरिका ने जो अनगिनत अपराध किये हैं और कर रहा है उसे इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM