क्या यूक्रेन युद्ध की समाप्ति का समय आ गया है?
फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां ने इटली में अपने एक संबोधन में कहा है कि अभी शांति की स्थापना का अवसर मौजूद है और उसका समय आने वाला है। हालांकि उनका यह भी कहना था कि रूस के साथ शांति के लिए शर्तों और समय का निर्धारण यूक्रेन को करना होगा। उन्होंने उन लोगों की भी आलोचना की जो रूस के साथ शांति वार्ता को यूक्रेन के लोगों के संघर्ष के साथ विश्वासघात बता रहे हैं।
मेक्रां का कहना थाः युक्रेन में जंग को जारी नहीं रखा जा सकता है, यह जंग हम यूरोपीयों के जीवन पर असर डाल रही है और इसके परिणाम स्वरूप भुखमरी और ग़रीबी फैल रही है।
इस बीच, रूस के रक्षा मंत्री सरगेई शाइगोव ने रविवार को अपने अमरीकी, फ़्रांसीसी और ब्रिटिश समकक्षों से टेलीफ़ोन पर बातचीत की और कहा कि यूक्रेन युद्ध एक अनियंत्रित लड़ाई की ओर बढ़ रहा है।
यूरोप में घटने वाली हालिया घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में शांति को लेकर फ़्रांसीसी राष्ट्रपति की इन बातों का मतलब समझा जा सकता है। अमरीका और यूरोपीय देशों का इस जंग की शुरूआत में मानना यह था कि रूस के ख़िलाफ़ व्यापक प्रतिबंध लगाकर और यूक्रेन को बड़ी सैन्य सहायता देकर मास्को को घुटने पर ले आयेंगे। लेकिन यूक्रेन युद्ध को आठ महीने हो गए हैं, इस दौरान रूस ने न सिर्फ़ यूक्रेन के चार इलाक़ों का अपनी सीमाओं में विलय कर लिया है, बल्कि पूरे यूक्रेन में बिजली घरों जैसे बुनियादी ढांचों पर व्यापक हमले किए हैं। आज इस जंग की तबाही और विनाश को पहले से ज़्यादा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
यूरोपीय नेताओं को अब युद्ध में यूक्रेन की जीत को लेकर पहले से भी ज़्यादा संदेह होने लगा है, इसीलिए अब वह इसे जारी रखने के पक्ष में नहीं हैं। इसके अलावा, यूक्रेन को हथियार देने के कारण, कुछ यूरोपीय देशों के हथियारों के भंडार ख़ाली होने लगे हैं, जिससे ख़ुद ज़रूरत के समय उनके लिए समस्या खड़ी हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि अमरीका एक ऐसा देश, जो यूक्रेन में युद्ध जारी रखना चाहता है, उसके अधिकारियों का कहना है कि इसी महीने होने वाले चुनाव में अगर जीत रिपब्लिकन की होती है तो, वर्तमान स्वरूप में कीव के लिए वाशिंगटन की सहायता को जारी रख पाना मुश्किल होगा।
प्रतिबंधों पर रूस की कड़ी प्रतिक्रिया का अंदाज़ा भी यूरोपीय अधिकारियों को नहीं था। रूस ने यूरोप के लिए गैस और तेल की सप्लाई या तो पूरी तरह से रोक दी है या उसमें बड़ी मात्रा में कटौती कर दी है। यूरोप में सर्दियों का मौसम क़रीब शुरू हो चुका है, लेकिन रूसी तेल और गैस की सप्लाई होने की फ़िलहाल कोई उम्मीद नहीं है। इस वजह से भी यूरोप में संकट उत्पन्न हो सकता है, जिससे यूरोपीय अधिकारी बचने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं।