शार्ली हेब्दो ने एक बार फिर धार्मिक प्रतीकों का किया अपमान
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फ़्रांस की कुख्यात मेगज़ीन शार्ली हेब्दो ने शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धार्मिक नेताओं का अपमान करके एक बार फिर अपनी इस्लाम के ख़िलाफ़ दुश्मनी को उजागर किया है और इस्लामोफ़ोबिया को हवा दी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०७, २०२३ ११:१० Asia/Kolkata
  • शार्ली हेब्दो ने एक बार फिर धार्मिक प्रतीकों का किया अपमान

फ़्रांस की कुख्यात मेगज़ीन शार्ली हेब्दो ने शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धार्मिक नेताओं का अपमान करके एक बार फिर अपनी इस्लाम के ख़िलाफ़ दुश्मनी को उजागर किया है और इस्लामोफ़ोबिया को हवा दी है।

यह कुख्यात मेगज़ीन इससे पहले पैग़म्बरे इस्लाम के अपमानजनक कार्टून प्रकाशित कर चुकी है और इसने अब ईरान की इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई और ईरान के राष्ट्रीय धार्मिक प्रतीकों के अपमानजनक कार्टून प्रकाशित करने के लिए एक  प्रतियोगिता का आयोजन किया है।

इस मेगज़ीन की इस हरकत के लिए दुनिया भर में व्यापक आलोचना हो रही है और एक बार फिर अभिव्यक्ति की आज़ादी के बहाने लोगों के धार्मिक विश्वासों और धार्मिक प्रतीकों के अपमान का मुद्दा गर्म हो गया है।

तेहरान ने शार्ली हेब्दो के इस क़दम की कड़ी निंदा की है और विदेश मंत्रालय में तेहरान स्थित फ़्रांसीसी राजदूत को तलब किया है।

ईरान की आपत्ति के बाद, फ़्रांसीसी विदेश मंत्री कैथरीन कोलोना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा हैः हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि ईरान के विपरीत फ़्रांस में अभिव्यक्ति की आज़ादी है। जिसकी एक स्वाधीन जज हमेशा निगरानी करता है।

दूसरे पश्चिमी देशों की तरह फ़्रांस भी मुसलमानों के ख़िलाफ़ अपमानजनक कृत्यों के लिए बयान की आज़ादी या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बहाना बनाता है। हालाकिं बयान की आज़ादी का मतलब, की भी स्थिति में दूसरों का अपमान नहीं हो सकता है।   

अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के अनुसार, किसी भी तरह का दुष्प्रचार और घृणा के लिए उकसाना, भेदभाव या द्वेष अवैध है। इसी तरह से सभी देशों को दुष्प्रचार या घृणा के प्रचार से बचने की आवश्यकता है, जो नस्लीय, धार्मिक, जातीय और सामुदायिक हिंसा को भड़काता है।

ज़ाहिर है, अंतरराष्ट्रीय क़ानून में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर ज़ोर दिया गया है, लेकिन अभिव्यक्ति की यह स्वतंत्रता दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक व्यवस्था और सार्वजनिक स्वास्थ्य और नैतिकता को बनाए रखने पर निर्भर है। इसलिए, फ्रांसीसी सरकार और अन्य पश्चिमी देशों के समर्थन से शार्ली हेब्दो द्वारा की गई अपमानजनक कार्यवाहियों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बहाने अपमान और नफरत को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।