यूक्रेन संकट में कूदे जापान और दक्षिणी कोरिया
यूक्रेन संकट के संदर्भ में जापान और दक्षिणी कोरिया ने अब अमरीका का खुलकर पक्ष लेना शुरू कर दिया है।
यूक्रेन युद्ध के बहाने रूस पर पश्चिमी प्रतिबंधो को अधिक विस्तृत करने में अमरीका के दो एशियन घटक देश महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों के अन्तर्गत जापान, रूस के दस से अधिक अधिकारियों को प्रतिबंधित कर रहा है।
इसी बीच दक्षिणी कोरिया ने भी घोषणा की है कि वह माॅस्को के विरुद्ध पश्चिमी प्रतिबंधों में बढ चढकर भाग लेगा हालांकि इससे पहले वह इस काम का इच्छुक नहीं था। अगर देखा जाए तो रुस के विरुद्ध पश्चिमी प्रतिबंधों को किसी भी अन्तर्राष्ट्रीय संगठन ने पारित नहीं किया है बल्कि अमरीका के साथ मिलकर केवल पश्चिमी देश ही यह काम कर रहे हैं। वैस रूस के विरुद्ध जापान और दक्षिणी कोरिया के प्रतिबंध कई आयामों से अमरीका के लिए विशेष महत्व रखते हैं।
एक तो यह कि इससे पता चलेगा कि रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों के लिए अमरीकी गठबंधन बढ़ता जा रहा है दूसरे यह कि इससे रूस पर अधिक दबाव बनेगा। जानकारों का कहना है कि रूस को अलग-थलग करने के उद्देश्य से पश्चिम की ओर से मास्को के विरुद्ध लगाए जाने वाले प्रतिबंध अबतक प्रभावी नहीं रहे हैं। एसे में यह पश्चिम विशेषकर अमरीका के लिए बहुत बड़ी विफलता है। यही कारण है कि रूस को अधिक से अधिक दबाव में डालने के लिए अमरीका का यह प्रयास है कि माॅस्को के विरुद्ध प्रतिबंध लगाने वाले देशों की सूचि बढ़ती जाए।
यूक्रेन युद्ध को आरंभ हुए एक वर्ष का समय गुज़र रहा है किंतु रूस की ओर से किसी भी कमज़ोरी का अभी तक प्रदर्शन नहीं हुआ है। रूस के विरुद्ध प्रतिबंधों को जापान और दक्षिणी कोरिया को अधिक नुक़सान हो सकता है क्योंकि उनकी अर्थव्यवस्थाएं आयात पर निर्भर हैं और रूस उनके लिए काफी बड़ी मंडी रहा है। रूस और जापान के बीच पहले से सीमा मतभेद पाए जाते हैं। एसे में दोनों देशों के बीच किसी भी मुद्दे को लेकर तनाव अधिक गहरी समस्या पैदा कर सकता है। जापान और दक्षिणी कोरिया की सरकारों ने सुदृढ़ सेना बनाने के लिए कुछ महत्वकांक्षी क़दम उठाए हैं। उनका सोचना है कि वर्तमान समय में अमरीका का साथ देने से क्षेत्र में वे अधिक प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि जापानी संविधान के अनुसार इस देश को सेना रखने की अनुमति ही नहीं है। अमरीका के समर्थन के कारण जापान के सत्ताधारी लिब्रल डेमोक्रेट दल ने अपने देश के संविधान को अनदेखा करते हुए नई सैन्य नीति अपनाई है। एक अन्य विषय यह है कि भूमि को लेकर जापान और दक्षिणी कोरिया के बीच गंभीर मतभेद पाए जाते हैं, दोनो देशों की सैन्य शक्ति के बढ़ने की स्थति में भविष्य में टोकियो और सियोल के लिए नई समस्याएं सामने आ सकती हैं। इन हालात में दूरदर्शिता यही है कि अमरीका की हस्तक्षेपपूर्ण नीतियों का समर्थन करने के बजाए दो पड़ोसी देश, अपने राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय हितों के दृष्टिगत ही कोई फैसला करें।
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