कथनी और करनी में अंतर क्यों है?
अफग़ानिस्तान की तालेबान सरकार के प्रवक्ता ने एलान किया है कि वह किसी भी सशस्त्र गुट को अपने पड़ोसी देशों के खिलाफ कार्यवाही की अनुमति नहीं देगा।
अब्दुल मतीन क़ानेअ ने कहा कि तालेबान गुट की यह सैद्धांतिक नीति है कि वह किसी भी हथियारबंद गुट को पड़ोसी देशों और क्षेत्र के खिलाफ कार्यवाही की अनुमति नहीं देगा।
यह बयान उस स्थिति में सामने आ रहा है जब पाकिस्तान अब भी अफगानिस्तान में आतंकवादी गुटों की उपस्थिति पर कड़ी आपत्ति जता रहा है और क्षेत्र, सेन्ट्रल एशिया और क्षेत्र से बाहर के देश इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि अफगानिस्तान आतंकवादियों के लिए सुरक्षित शरण स्थली बनता जा रहा है।
तालेबान ने 15 अगस्त 2021 को सत्ता की बाग़डोर संभाली थी तब से अब तक उसने बारमबार एलान किया है कि वह कदापि इस बात की अनुमति नहीं देगा कि अफगानिस्तान की भूमि का प्रयोग पड़ोसी देशों के खिलाफ हमलों व कार्यवाहियों के लिए किया जाये परंतु खुद अफगानिस्तान के अंदर अतिवादियों के हमलों और इसी तरह पड़ोसी देशों के खिलाफ अफगानिस्तान से आतंकवादी हमलों के होने की वजह से काफी सीमा तक तालेबान के दावों पर प्रश्न चिन्ह लग गया है और उसे असमंजस की दृष्टि से देखा जा रहा है।
इस बारे में राजनीतिक मामलों के एक विशेषज्ञ मंसूर अहमद खान कहते हैं कि तालेबान को अफगानिस्तान की सत्ता की बागडोर संभाले हुए लगभग दो साल का समय हो रहा है परंतु वह आज तक तालेबान की सरकार को मान्यता देने के लिए क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय जनमत को विश्वास में नहीं ले पाया। इसी तरह वह उन गुटों का सफाया न कर सका जो अफगानिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
जानकार हल्कों का मानना है कि इसकी एक वजह यह है कि तालेबान मुख्य चुनौतियों से मुकाबला करने बजाये छोटे छोटे मामलों पर ध्यान दे रहा है और अभी वह विश्व समुदाय विशेषकर पड़ोसी देशों की चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। वास्तविकता भी यही है कि तालेबान के अधिकारी केवल ज़बान से आतंकवादी गुटों से मुकाबले के बारे में अपनी प्रतिबद्धता जताते हैं और काबुल में एक प्रेस कांफ्रेस में तालेबान सरकार के प्रवक्ता अब्दुल मतीन के बयान को भी इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। उन्होंने इस प्रेस कांफ्रेन्स में कहा कि अफगानिस्तान में बंधूकधारी गुटों की उपस्थिति के बारे में जो बातें कही जाती हैं वे केवल प्रचारिक हैं और इसका लक्ष्य अफगानिस्तान के लोगों और पड़ोसी देशों में चिंता उत्पन्न करना है।
बहरहाल दाइश को इस समय अफगानिस्तान में सबसे महत्वपूर्ण आतंकवादी गुट समझा जा रहा है और अभी हाल ही में उसने तालेबान के स्थानीय अधिकारी के खिलाफ हमला किया है और तालेबान से पहले अफगानिस्तान की पूर्व सरकार के अधिकारी हमेशा यह दावा करते थे कि लगभग 200 हथियारबंद आतंकवादी इस देश में सक्रिय हैं।
बहरहाल तालेबान द्वारा अफगानिस्तान की सत्ता की बागडोर संभाले हुए लगभग दो साल का समय हो रहा है परंतु आज तक न तो इस देश में व्यापक सरकार का गठन हो पाया और न ही इस देश से पूरी तरह आतंकवादी गुटों का सफाया हो पाया और यह वह विषय है जो विश्व समुदाय विशेषकर क्षेत्रीय देशों की चिंता का कारण है और यह चिंता उस समय तक बाकी रहेगी जब तक तालेबान अधिकारी गंभीरता के साथ इस संबंध में कदम नहीं उठायेंगे। MM
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