नीदरलैंड का नस्लभेदी फ़ैसला, राष्ट्रीयता देखकर दिया जाएगा रोज़गार
नीदरलैंड्स इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन राइट्स के इस फ़ैसले के बाद कि डच कंपनी "एएसएमएल" को आवेदकों के रोज़गार अनुरोध को उनकी राष्ट्रीयता के आधार पर अस्वीकार करने की अनुमति है, इस कंपनी ने जिसका अमेरिका के साथ व्यापक व्यापारिक संबंध है, सोमवार को इस फ़ैसले पर संतोष व्यक्त किया।
नीदरलैंड के फेल्डहोवेन शहर में स्थित "एएसएमएल" कंपनी दुनिया में सेमीकंडक्टर उपकरण और कंप्यूटर चिप्स के प्रमुख निर्माताओं में से एक है जो 120 विभिन्न राष्ट्रीयताओं वाले 31 हज़ार से अधिक लोगों को रोज़गार देती है।
नीदरलैंड इंस्टीट्यूट फॉर ह्यूमन राइट्स ने इस सप्ताह पुष्टि की कि कंपनी को ईरान, सीरिया, क्यूबा और उत्तरी कोरिया के उन नौकरी के आवेदनों को अस्वीकार करने की अनुमति है जो संवेदनशील अमेरिकी टेक्नालाजी तक पहुंच बना सकते हैं, यह काम यद्पि डच क़ानून के अनुरूप न हो तब भी।
एएसएमएल द्वारा भर्ती के अंतिम चरण में सीरिया के एक इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर की राष्ट्रीयता के कारण उसकी नियुक्ति को अस्वीकार करने के बाद, नीदरलैंड के रॉटरडैम शहर में स्थित एक भेदभाव-विरोधी फाउंडेशन ने इस कंपनी के रोज़गार नियमों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज की और इस बात पर जोर दिया कि डच क़ानून भेदभाव पर रोक लगाता है और यह देश राष्ट्रीयता को किसी भी चीज़ का आधार नहीं मानता।
अलबत्ता यह पहली बार नहीं है कि पश्चिमी देश अमेरिका द्वारा स्वीकृत देशों के नागरिकों की शिक्षा या रोज़गार पर रोक लगा देते हैं। कुछ साल पहले, उत्तरी यूरोप में नॉर्वे ने, जिसके वाशिंगटन के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, ईरानी छात्रों को संवेदनशील क्षेत्रों में उच्च स्तरीय अध्ययन करने से रोक दिया था जो स्पष्ट रूप से अमेरिका की इच्छाओं के अनुरूप था।
इस संबंध में 2014 की शुरुआत में, नॉर्वेजियन पुलिस ने नॉर्वे में रहने वाले 64 ईरानी छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया जो विभिन्न शैक्षणिक विभागों व क्षेत्रों में पढ़ रहे थे। विश्व इस्लामिक शांति मंच की संचालन परिषद के सदस्य मोहसिन पाक आईन कहते हैं कि इस्लामी गणतंत्र ईरान सहित साम्राज्य का विरोध करने वाले देशों का वैज्ञानिक बहिष्कार, वर्चस्ववादी व्यवस्था द्वारा वैज्ञानिक रंगभेद व नस्लभेद के उदाहरणों में से है। (AK)
हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए
हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए