यूरोपीय देश शरणार्थियों को निकाले के प्रयास में
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जर्मनी बिना बताये अपने देश में आये विदेशी शरणार्थियों को निकालने की प्रक्रिया को गति देने के प्रयास में है।
(last modified 2023-08-17T05:58:17+00:00 )
Aug १७, २०२३ ११:२८ Asia/Kolkata

जर्मनी बिना बताये अपने देश में आये विदेशी शरणार्थियों को निकालने की प्रक्रिया को गति देने के प्रयास में है।

जर्मन गृहमंत्री ने कहा कि इस देश की पुलिस शरणार्थियों को जमा करके उन्हें देश से निकालने के प्रक्रिया को और गति से लागू कर सकती है। जर्मन सरकार की घोषणा के अनुसार लगभग 13 हज़ार शरणार्थियों को देश से निकल जाना चाहिये था जिन्हें वर्ष 2022 में जर्मनी से निकल दिया गया।

जर्मनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस संबंध में चेतावनी देते हुए कहा है कि शरणार्थियों को निकालने के संबंध में सरकार की नीति बहुत से शरणार्थियों के लिए त्रासदी सिद्ध होगी और उन्होंने शरणार्थियों को वापस भेजने के संबंध में सरकार की नीति को मानवीय प्रतिष्ठा के खिलाफ बताया। यूरोपीय देश विशेषकर जर्मनी और फ्रांस दूसरे देशों से इन देशों में जाने वाले शरणार्थियों को बाहर निकालना चाहते हैं।

विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में युद्ध, अशांति और आर्थिक समस्याओं के कारण कुछ देशों जैसे अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया, यूक्रेन और अफ्रीका सहित विभिन्न देशों के नागरिक यूरोपीय देशों में शरण लेने का प्रयास करते हैं और पिछले वर्ष सबसे अधिक यूक्रेनी नागरिकों ने यूरोपीय देशों में शरण ली है। अच्छे और बेहतर जीवन की खोज में तीसरी दुनिया और अफ्रीकी देशों के लोग यूरोपीय देशों में शरण लेने का प्रयास करते हैं और बहुत से शरणार्थी समुद्री यात्रा करने के बाद इन देशों में पहुंचे हैं जबकि सैकड़ों शरणार्थियों की मौत हो चुकी है और जिन शरणार्थियों को दोबारा फ्रांस और जर्मनी से निकाला जायेगा उन्हें बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।

राष्ट्रसंघ की घोषणा के अनुसार वर्ष 2022 में बेघर होने वाले लोगों की संख्या 11 करोड़ तक पहुंच गयी है। बेघर होने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण अफगानिस्तान में जंग और तालेबान का सत्ता में आना और इसी तरह यूक्रेन और सूडान में युद्ध को बताया गया है। रोचक बात यह है कि पश्चिमी देश एक ओर मानवाधिकारों की रक्षा का दम भरते हैं और दूसरी ओर बहुत समस्याओं का सामना करने के बाद जो लोग उनके देशों में पहुंच गये हैं और वहां पर वे शरणार्थी का जीवन व्यतीत कर रहे हैं उन्हें निकालने के प्रयास में हैं।

यूरोपीय दूशों का यह रवइया मानवता व इंसानों की प्रतिष्ठा से किसी प्रकार मेल नहीं खाता। शरणार्थियों को दोबारा वापस भेजने पर आधारित जर्मनी जैसे यूरोपीय देशों के इरादे से इन देशों की वास्तविकता एक बार फिर स्पष्ट हो गयी है कि वे मानवाधिकारों की रक्षा में कितने सच्चे हैं। MM

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