फ्रांस में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ मे हिजाब से खिलवाड़
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लंबे समय से फ्रांस में मुस्लिम महिलाओं को पर्दे को लेकर कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है
(last modified 2023-09-28T06:27:17+00:00 )
Sep २८, २०२३ ११:५७ Asia/Kolkata

लंबे समय से फ्रांस में मुस्लिम महिलाओं को पर्दे को लेकर कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है

संयुक्त राष्ट्रसंघ के मानवाधिकार आयोग के प्रवक्ता मार्था हुरटाडो ने फ़्रांस की ओर से ओलंपिक खेलों में खिलाड़ियों द्वारा इस्लामी हेजाब पहनने पर प्रतिबंध की निंदा की है।  फ्रांस में 2024 में ओलंपिक आयोजित होंगे। 

मार्था हुरटाडों ने कहा कि किसी को भी महिलाओं को कपड़े पहनने के लिए मजबूर करने का कोई अधिकार नहीं है।  उनका कहना था कि अन्तर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार धार्मिक अभिव्यक्ति और कपड़ों के प्रकार पर प्रतिबंध केवल उसी स्थति में लगाया जा सकता है जब यह विषय सामाजिक सुरक्षा या फिर सामुदायिक स्वास्थ्य के लिए ख़तरा बन जाए।  इस्लामी आवरण इन नियमों के विरुद्ध नहीं है।

राष्ट्रसंघ की ओर से यह प्रतिक्रिया, फ्रांस के खेल मंत्री की ओर की जाने वाली विवादित घोषणा के बाद सामने आई।  फ्रांसीसी खेलमंत्री ने एलान किया था कि अगले साल पेरिस में आयोजित होने वाले ओलंपिक खेलों के दौरान सेक्यूलरिज़्म का सम्मान करते हुए हेजाब पहनने पर प्रतिबंध रहेगा।  फ्रांस के मुसलमान खिलाड़ियों की ओर से इन नए क़ानून की आलोचना की जा रही है। 

इससे पहले फ्रांस में स्कूलों में अबाया पहनने पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।  विश्व की महत्वपूर्ण अन्तर्राष्ट्रीय संस्था संयुक्त राष्ट्रसंघ की ओर से हिजाब के बारे में फ्रांस के नए क़ानून की आलोचना, फ्रांस सरकार के तथाकथित मानवाधिकारों और स्वतंत्रता के दावों को रद्द करती है। 

लंबे समय से फ्रांस में मुस्लिम महिलाओं को पर्दे को लेकर कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है जबकि फ्रांस की सरकार देश के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का राग अलापती रहती है।  वहां पर स्कूलों में पर्दे पर प्रतिबंध के कारण मुस्लिम लड़कियों को शिक्षा जारी रखने में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।  फ्रांस के शिक्षामंत्री ने अभी हाल में कहा था कि इस्लामी हेजाब, फ्रांस के सेक्यूलर नियमों का उल्लंघन करता है। 

फ्रांस में हालिया कुछ वर्षों के दौरान मुसलमानों के विरुद्ध दबाव और इस्लामोफोबिया में वृद्धि तेज़ी से बढ़ी है।  फ्रांस के वर्तमान दक्षिणपंथी राष्ट्रपति मैक्रां के कार्यकाल में इस देश मे रहने वाले मुसलमानों के विरुद्ध कई क़ानून पारित किये गए।  इन क़ानूनों ने फ्रांस में मुसलमानों के लिए जीवन को बहुत कठिन बना दिया है।  फ्रांस के स्कूलों और विश्विद्यालयों में हेजाब पर प्रतिबंध और साथ ही मुसलमान खिलाड़ियों के लिए ओलंपिक में हेजाब के प्रयोग पर रोक इसके स्पष्ट उदाहरण हैं। 

फ्रांस में जहां एक ओर दक्षिणपंथी दल, हिजाब पर प्रतिबंध लगाने पर ज़ोर दे रहे हैं वहीं पर इस देश के वामपंथी राजनेता, मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों को लेकर बहुत चिंतित दिखाई दे रहे हैं।

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