यमन पर बमबारी से भड़क गए अमरीकी अधिकारी
अमरीका के कई अधिकारी और हस्तियां यमन पर अमरीकी हमलों पर नाराज़ हो गईं और उनका कहना है कि इन हमलों के लिए क़ानूनी प्रक्रिया पूरी नहीं की गई थी।
अमरीका की एयर फ़ोर्स कमांड ने एक बयान में कहा कि सेना की कमांड के आदेश के अनुसार शुक्रवार की सुबह यमन की सेना के 16 ठिकानों में 60 से अधिक टारगेट पर 100 से ज़्यादा गाइडेड मिसाइल फ़ायर किए गए।
यह हमला तब किया गया जब अमरीकी संविधान के अनुसार कोई भी जंग शुरू करने की अनुमति देने का अधिकार कांग्रेस के पास है लेकिन पिछले 230 साल में जंग के मामले में कांग्रेस के अधिकार धीरे धीरे सीमित होते गए हैं और सरकार को खुली छूट मिली है।
1973 में पास होने वाले जंग के अधिकारों के क़ानून के अनुसार अमरीकी सरकार ख़ास हालात में किसी देश के ख़िलाफ़ जंग में उतर सकती है लेकिन 72 घंटे के भीतर उसे कांग्रेस को इसकी सूचना देनी होगी। इसी का दुरुपयोग करते हुए अमरीका के कई राष्ट्रपतियों ने कांग्रेस की अनुमति लिए बिना दूसरे देशों से जंगें की हैं।
अमरीकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य रशीदा तुलैब ने एक्स अकाउंट पर लिखा कि अमरीका की जनता कभी न ख़त्म होने वाली जंगों से थक चुकी है।
प्रतिनिधि सभा की रिपब्लिकन मेंबर मारजोरी टेलर ग्रीन ने भी एक्स पर लिखा कि जो बाइडन यमन पर बमबारी का फ़ैसला अकेले नहीं कर सकते।
जील स्टाइन अमरीकी राष्ट्रपति चुनाव के एक उम्मीदवार ने लिखा कि जेनोसाइड से हम तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर पहुंच रहे हैं।
एंटी वार एक्टिविस्ट मेदया बेंजामिन ने लिखा कि यमन के लोग बस यह चाहते हैं कि ज़ायोनी शासन का कोई साथ न दे और अमरीका ज़ायोनी शासन के हाथों जारी नस्लीय सफ़ाया रुकवाए।
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