क्या अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ज़रूरी थी?
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पार्स टुडे – एक अमेरिकी संस्थान ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका की वापसी की सालगिरह पर लेख प्रकाशित किया।
(last modified 2025-09-04T07:57:03+00:00 )
Sep ०२, २०२५ १३:५३ Asia/Kolkata
  • क्या अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ज़रूरी थी?
    क्या अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी ज़रूरी थी?

पार्स टुडे – एक अमेरिकी संस्थान ने अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिका की वापसी की सालगिरह पर लेख प्रकाशित किया।

अमेरिकी संस्थान Responsible Statecraft ने हाल ही में रोज़मेरी क्लैनिक Rosemary Kelanic के लेख में लिखा: अमेरिका के 30 अगस्त 2021 को अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के चार साल पूरे हो गए हैं। यह वापसी लगभग 20 साल लंबे एक कब्ज़े का अंत थी जिसे असीमित सैन्य मिशनों के विस्तार का एक उदाहरण माना जा सकता है।

 

रिपोर्ट के अनुसार जो हस्तक्षेप अक्टूबर 2001 में अफ़ग़ानिस्तान में अल-क़ायदा को नष्ट करने के लिए एक सीमित कार्रवाई के रूप में शुरू हुआ था वह एक असीमित अभियान में बदल गया जिसका अमेरिका को भारी ख़र्च उठाना पड़ा। इन सालों के दौरान अमेरिका के 2,334 सैनिक मारे गए और 20 हज़ार से अधिक घायल हुए।

 

अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका की नीतियाँ तथाकथित तरीक़ों, जैसे "राष्ट्र-निर्माण" और लोकतंत्र-स्थापित करने पर आधारित थीं ऐसे देश में जिसकी संस्कृति और राजनीतिक परिस्थितियाँ पश्चिम से बिल्कुल अलग थीं। अंततः ये नीतियाँ असफल साबित हुईं और अफ़ग़ानिस्तान के सामाजिक व राजनीतिक ढाँचे में कोई बुनियादी बदलाव नहीं ला सकीं।

 

इसके बजाय संयुक्त राज्य अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में उन ख़तरों पर ध्यान केंद्रित करने की बजाय, जिनसे निपटने का वह दावा करता था, जटिल परियोजनाओं में खुद को उलझा लिया। ये न केवल असफल रहीं, बल्कि भारी मानव और आर्थिक लागत भी लेकर आईं।

 

फ़िर भी अमेरिकी नीति-निर्माता दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों में सैन्य मौजूदगी को जायज़ ठहराने में लगे हुए हैं जबकि साक्ष्य बताते हैं कि जिन ख़तरों से निपटने का वे दावा करते हैं उन्हें बिना सैन्य क़ब्ज़े के भी नियंत्रित किया जा सकता है। यह बिंदु भविष्य की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण सबक़ हो सकता है। इसी कारण, संयुक्त राज्य अमेरिका सितंबर में इराक़ में अपने मिशन को समाप्त कर सकता है और वर्ष 2026 के अंत तक अपने सभी 2,500 सैनिकों को वहाँ से निकाल सकता है।

 

इसके अलावा यह विश्लेषण अमेरिका के सीरिया और अफ़्रीका के 10 से अधिक देशों से निकलने की तार्किकता को और मज़बूत करता है। यह मुद्दा दर्शाता है कि अमेरिका को इन क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी को पूरी तरह कम करना चाहिए।

 

अंततः कहा जा सकता है कि अन्य देशों में अमेरिका की सैन्य मौजूदगी की नीतियाँ वास्तविक सुरक्षा प्राथमिकताओं से ग़फ़लत का प्रतीक थीं। इन ग़लतियों के कारण अमेरिका न केवल अपने प्रारंभिक लक्ष्यों को हासिल करने में असफल रहा, बल्कि अपनी बहुत सी संसाधन और ताक़त को एक अंतहीन और अप्रभावी युद्ध में गँवा बैठा। इन अनुभवों को भविष्य में समान संकटों के लिए अमेरिका की नीतियों में सबक़ के तौर पर लिया जाना चाहिए। MM