अमेरिकी जनता की ट्रंप के युद्धोन्माद पर नकारात्मक प्रतिक्रिया
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पार्सटुडे – अमेरिकी जनता ने वर्ष 2026 में ईरान के खिलाफ़ किसी भी नए सैन्य हमले का अभूतपूर्व दृढ़ता के साथ विरोध किया है और ट्रंप के युद्धोन्माद पर नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
(last modified 2026-02-22T09:28:52+00:00 )
Feb २१, २०२६ १७:०९ Asia/Kolkata
  • अमेरिकी जनता की ट्रंप के युद्धोन्माद पर नकारात्मक प्रतिक्रिया
    अमेरिकी जनता की ट्रंप के युद्धोन्माद पर नकारात्मक प्रतिक्रिया

पार्सटुडे – अमेरिकी जनता ने वर्ष 2026 में ईरान के खिलाफ़ किसी भी नए सैन्य हमले का अभूतपूर्व दृढ़ता के साथ विरोध किया है और ट्रंप के युद्धोन्माद पर नकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार जहां अमेरिका के विवादास्पद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और वाशिंगटन के कुछ कट्टरपंथी चेहरे ईरान के साथ युद्ध की बात कर रहे हॅं वहीं अमेरिका में नवीनतम सर्वेक्षण इस देश की जनता की पूरी तरह से अलग तस्वीर पेश करते हैं। मार्च 2003 के विपरीत, जब इराक पर हमले को 72 प्रतिशत अमेरिकियों का समर्थन प्राप्त था, अब अमेरिकी जनता बड़े पैमाने पर पश्चिम एशिया में एक और युद्ध शुरू करने के लिए 'नहीं' का जवाब दे रही है।

 

फरवरी 2026 की शुरुआत में मैरीलैंड विश्वविद्यालय और SSRS द्वारा किए गए संयुक्त सर्वेक्षण के अनुसार केवल 21 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक ईरान पर सैन्य हमले का समर्थन करते हैं जबकि 49 प्रतिशत स्पष्ट रूप से किसी भी सैन्य कार्रवाई का विरोध करते हैं और 30 प्रतिशत अनिर्णीत हैं। जून 2025 के हमलों के बाद के सर्वेक्षणों की तुलना में ये आंकड़े व्यापक विरोध की निरंतर प्रवृत्ति को दर्शाते हैं।

 

उल्लेखनीय बात यह है कि रिपब्लिकन खेमे में भी युद्ध को लेकर कोई सहमति नहीं है। हालांकि यह पार्टी 40 प्रतिशत के साथ सैन्य विकल्प के लिए सबसे अधिक इच्छुक है लेकिन 25 प्रतिशत रिपब्लिकन मतदाता युद्ध के विरोध में हैं और 35 प्रतिशत की कोई स्पष्ट स्थिति नहीं है।

 

ये निष्कर्ष पहले भी अमेरिकी सर्वेक्षणों में स्पष्ट हो चुके थे। वास्तव में हाल के महीनों में कई सर्वेक्षणों से पता चला है कि 'अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप' के प्रयास को कड़ी हार का सामना करना पड़ा है:

 

जनवरी 2026 के अंत में इकोनॉमिस्ट/यूगव द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 48 प्रतिशत अमेरिकी ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के विरोध में थे जबकि 28 प्रतिशत समर्थन में थे। जब प्रश्न 'प्रदर्शनकारियों के समर्थन' के परिदृश्य के साथ पूछा गया तो विरोध बढ़कर 52 प्रतिशत हो गया।

 

साथ ही जनवरी 2026 की शुरुआत में क्विनिपियाक विश्वविद्यालय द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार ट्रंप की धमकी के एक सप्ताह बाद कि वह 'तैयार और सशस्त्र' हैं, 70 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि अमेरिका को ईरान के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए और केवल 18 प्रतिशत ने हस्तक्षेप का समर्थन किया।

 

विश्लेषकों के अनुसार इराक युद्ध की कड़वी याद ने वर्तमान अमेरिकी मानसिकता पर भारी छाया डाली है। इराक पर हमले की 20वीं बरसी पर 61 प्रतिशत अमेरिकियों ने उस आक्रमण को एक बड़ी गलती बताया। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप ने अब तक ईरान पर हमला करने से परहेज किया है, इसका कारण यह है कि 2003 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के विपरीत, वे सार्वजनिक समर्थन बनाने के लिए कोई व्यापक प्रचार अभियान सफलतापूर्वक नहीं चला पाए हैं और रिपब्लिकन पार्टी में भी फूट है। साथ ही संभवतः इन सर्वेक्षणों ने इस संबंध में उनके निर्णय लेने में भूमिका निभाई है।

 

ऐसा प्रतीत होता है कि ट्रंप के युद्धोन्माद के खिलाफ अमेरिकी जनता के व्यापक विरोध की जड़ें ठोस कारणों और कड़वे ऐतिहासिक अनुभवों पर आधारित हैं।

 

इसका एक कारण 21वीं सदी में अमेरिका के 'अंतहीन युद्धों' से अत्यधिक थकान है। वास्तव में सार्वजनिक विरोध का सबसे महत्वपूर्ण कारण अफगानिस्तान और इराक में दो दशकों के क्षरणकारी युद्ध की कड़वी याद है। अमेरिकियों ने महसूस किया है कि इन युद्धों ने न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की बल्कि खरबों डॉलर खर्च हुए और हजारों लोग मारे गए और घायल हुए। 2003 के विपरीत, जब 72 प्रतिशत लोगों ने इराक पर हमले का समर्थन किया था आज लगभग 21 प्रतिशत ही ऐसी गलती दोहराने के समर्थन में हैं। लोग उन राजनेताओं से दूर हो गए हैं जिन्होंने इन युद्धों को समाप्त करने का वादा किया था लेकिन अब एक नया युद्ध शुरू करने की सोच रहे हैं।

 

दूसरा कारण ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्र में आग भड़कने का डर है। आम धारणा के विपरीत अमेरिकी लोग ईरान की सैन्य शक्ति और जवाब देने की उसकी क्षमता को गंभीरता से लेते हैं। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि लगभग 80 प्रतिशत लोग एक व्यापक युद्ध और ईरान की प्रतिक्रिया को लेकर चिंतित हैं। ईरान के पड़ोस में दर्जनों अमेरिकी ठिकानों की मौजूदगी और इस देश की उच्च मिसाइल क्षमता ने इस चिंता को बढ़ा दिया है कि किसी भी हमले की कीमत अमेरिकी सैनिकों के जीवन और क्षेत्रीय सहयोगियों की सुरक्षा के रूप में चुकानी पड़ सकती है।

 

तीसरा कारण अमेरिकी सरकार के प्रति अविश्वास और पारदर्शिता की कमी से संबंधित है। ट्रंप प्रशासन इस हमले के लिए कोई ठोस औचित्य प्रस्तुत नहीं कर पाया है। एक ओर यह पिछले साल के हमलों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के 'पूर्ण विनाश' का दावा करता है और दूसरी ओर उसी कार्यक्रम को नए युद्ध के बहाने के रूप में इस्तेमाल करता है। यह विरोधाभास और कांग्रेस में किसी भी गंभीर बहस और मतदान की कमी ने इस संदेह को मजबूत किया है कि व्हाइट हाउस एक अनावश्यक और कानूनी अधिकार के बिना युद्ध की तलाश में है।

 

अगला कारण विदेशी साहसिक कार्यों पर घरेलू प्राथमिकताओं की आवश्यकता है। अमेरिकी मतदाता, विशेष रूप से वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में, चाहते हैं कि अमेरिकी सरकार मुद्रास्फीति और जीवन यापन की लागत जैसी घरेलू समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करे और किसी नए युद्ध पर अरबों डॉलर के किसी भी खर्च को राष्ट्रीय हितों के विपरीत मानते हैं। यहां तक कि रिपब्लिकन और 'अमेरिका फर्स्ट' आधार के बीच भी यह मजबूत धारणा है कि ईरान के साथ युद्ध न केवल 'अमेरिका फर्स्ट' के नारे को पूरा करने के अनुरूप है बल्कि यह देश को एक नए दलदल में धकेल देगा। MM