ब्रिक्स साइबर सुरक्षा, 2026 में भारत की बैठक की रणनीतिक प्राथमिकता
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ब्रिक्स साइबर सुरक्षा, 2026 में भारत की बैठक की रणनीतिक प्राथमिकता
पार्सटुडे- डिजिटल परिवर्तन के विस्तार और स्मार्ट हमलों में वृद्धि के साथ, ब्रिक्स की साइबर सुरक्षा 2026 में भारत में होने वाली बैठक की कार्यसूची के मुख्य विषयों में से एक बन गई है।
पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार, टीवी ब्रिक्स के हवाले से, डिजिटल खतरों की तीव्रता और हैकर्स द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के बढ़ते उपयोग के मद्देनजर, इस समूह की 2026 में भारत में होने वाली बैठक की पूर्व संध्या पर, ब्रिक्स साइबर सुरक्षा का मुद्दा नेताओं और विशेषज्ञों के ध्यान का केंद्र बन गया है। ब्रिक्स के सदस्य ऐसे समय में सामान्य साइबर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं जब डिजिटल परिवर्तन एक साथ उनके लिए आर्थिक विकास का इंजन और उनकी राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए नए जोखिमों का स्रोत बन गया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में बुनियादी ढांचे के विश्लेषण, फ़िशिंग हमलों को अंजाम देने और कमजोरियों की पहचान के लिए तंत्रिका नेटवर्क और एआई उपकरणों के संगठित उपयोग में वृद्धि हुई है, और साइबर हमले आम उपयोगकर्ताओं के स्तर से आगे बढ़कर ऊर्जा, परिवहन और वित्त जैसे क्षेत्रों के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बना रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ 'नीना शेवचुक' के अनुसार, "ब्रिक्स के लिए, डिजिटल परिवर्तन एक साथ विकास का चालक और वैश्विक प्रकृति के व्यवस्थित जोखिमों का स्रोत है।"
इसी संदर्भ में, सूचना प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ 'शिमोन तनायेव' ने विभिन्न सदस्य देशों में डिजिटल धोखाधड़ी के समान पैटर्न का उल्लेख करते हुए जोर दिया: "हम सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में संगठित वैश्विक अपराध का सामना कर रहे हैं, जो उपयोगकर्ताओं के विश्वास का दुरुपयोग करके लाभ कमाना चाहता है।"
ब्रिक्स साइबर सुरक्षा में एकरूपता का प्रयास
विशेषज्ञ साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में समन्वित तंत्र बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं, जिसमें संयुक्त अभ्यास आयोजित करना, एकीकृत निगरानी प्रणाली शुरू करना और तीव्र सूचना आदान-प्रदान को मजबूत करना शामिल है। हालांकि, सदस्यों के बीच तकनीकी और नियामक अंतर ने एक एकीकृत प्रणाली के गठन को जटिल बना दिया है।
ब्राजील, भारत और चीन को ब्रिक्स में सूचना सुरक्षा के अग्रदूतों के रूप में पेश किया गया है, ये वे देश हैं जिन्होंने व्यापक कानून पारित करके, सुरक्षा संचालन केंद्र (एसओसी) और घटना प्रतिक्रिया केंद्र (सीआईआरटी) स्थापित करके और मानव संसाधन प्रशिक्षण में व्यापक निवेश करके अपने बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। अन्य सदस्यों, जिनमें रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात और इथियोपिया शामिल हैं, ने भी साइबर सुरक्षा और डेटा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रमों को अपने एजेंडे में शामिल किया है।
2026 में "ब्रिक्स साइबर सुरक्षा गठबंधन" बनाने का प्रस्ताव भी इसी ढांचे में रखा गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि समन्वय जारी रहता है, तो ब्रिक्स साइबर सुरक्षा अंतर्राष्ट्रीय सूचना सुरक्षा के क्षेत्र में वैश्विक दक्षिण के सहयोग के लिए एक मॉडल बन सकती है। (AK)
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