आशूरा का झंडा यूरोप में लहराया
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पार्स टुडे – 9 मुहर्रम और 10 मुहर्रम के अवसर पर हजारों शिया और अहले-बैत (अ.स.) के प्रेमियों ने यूरोप के विभिन्न शहरों में शोक के झंडे लहराए और 'लब्बैक या हुसैन' के नारे लगाकर कर्बला के स्वतंत्रता, सम्मान और प्रतिरोध का संदेश इस महाद्वीप के दिल में गूँज दिया।
(last modified 2026-06-26T11:11:38+00:00 )
Jun २६, २०२६ १६:३८ Asia/Kolkata
  • आशूरा का झंडा यूरोप में लहराया
    आशूरा का झंडा यूरोप में लहराया

पार्स टुडे – 9 मुहर्रम और 10 मुहर्रम के अवसर पर हजारों शिया और अहले-बैत (अ.स.) के प्रेमियों ने यूरोप के विभिन्न शहरों में शोक के झंडे लहराए और 'लब्बैक या हुसैन' के नारे लगाकर कर्बला के स्वतंत्रता, सम्मान और प्रतिरोध का संदेश इस महाद्वीप के दिल में गूँज दिया।

पार्स टुडे के अनुसार लंदन, ओस्लो, हेग, हैम्बर्ग, रोम, ब्रुसेल्स और स्टॉकहोम की सड़कों और इस्लामी केंद्रों ने हाल के दिनों में शोक मनाने वालों की मेजबानी की, जो विभिन्न राष्ट्रीयताओं और भाषाओं के साथ, इमाम हुसैन (अ.स.) (सय्यिदुश-शुहदा) के झंडे के चारों ओर एकत्र हुए और उस वीरता की स्मृति को जीवित रखा जो सदियों बाद भी दुनिया के स्वतंत्र लोगों को प्रेरित करती है।

 

इन समारोहों में सबसे भव्य में से एक नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित किया गया। विभिन्न पृष्ठभूमियों और राष्ट्रीयताओं के लगभग 2,000 शियाओं और अहले-बैत (अ.स.) के प्रेमियों ने आशूरा मार्च नामक जुलूस में भाग लिया और कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन (अ.स.) और उनके वफादार साथियों की दृढ़ता साहस और बलिदान की स्मृति का सम्मान किया।

 

हुसैनी आशूरा का जुलूस नीदरलैंड के हेग में भी आयोजित किया गया। शोक मनाने वालों ने 'महफ़िल-ए-अली' इस्लामी केंद्र में शोक सभा आयोजित करने के बाद हुसैनी झंडों के साथ इस शहर की सड़कों पर निकले और शोक गीत गाकर यानी नौहे पढ़कर और सीने पर हाथ मारकर और आशूराई नारे लगाकर, सय्यिदुश-शुहदा (अ.स.) और उनके वफादार साथियों की आवाज़ को दोहराया।

 

हैम्बर्ग ने भी आज शुक्रवार को आशूरा जुलूस की मेजबानी की है। बेल्जियम के ब्रुसेल्स में 'महदिये' ने 25 जून से फ़ारसी-भाषी शोक मनाने वालों और अहले-बैत (अ.स.) के अन्य प्रेमियों की उपस्थिति के साथ मुहर्रम के पहले दशक के कार्यक्रम आयोजित किए हैं। स्टॉकहोम और स्वीडन के अन्य शहरों में भी फ़ार्सी, अरबी और स्वीडिश भाषाओं में इसी तरह की सभाएँ आयोजित की गईं जिन्होंने मुस्लिम प्रवासियों की विभिन्न पीढ़ियों को सय्यिदुश-शुहदा (अ.स.) के झंडे के नीचे एकत्र किया।

 

बर्लिन में एक बड़ा आशूरा जुलूस अगले शनिवार के लिए निर्धारित किया गया है। आयोजकों ने सभी स्वतंत्र लोगों और अत्याचार के विरोधियों को इस आंदोलन में भाग लेने और जर्मनी की राजधानी में 'हैहात मिन्ना-ज़-ज़िल्ला' (हमसे अपमान दूर है) का शाश्वत संदेश के लिए आमंत्रित किया है।

 

ब्रिटेन में भी ब्रिटिश इस्लामी केंद्र और लंदन तथा अन्य शहरों में दर्जनों मस्जिदें, हुसैनिये और धार्मिक केंद्र, तासुआ और आशूरा-ए-हुसैनी की सभाएँ आयोजित कर रहे हैं। मुख्य आशूरा जुलूस शुक्रवार को लंदन के केंद्र में आयोजित किया जाएगा।

 

सय्यिदुश-शुहदा (अ.स.) का लाल झंडा सदियों के बाद भी दुनिया के स्वतंत्र लोगों को बुला रहा है और यूरोप के दिल में 'या हुसैन' की आवाज़ की गूँज इस बात का प्रमाण है कि कर्बला का संदेश न तो बुझता है और न ही सीमाएँ मानता है। mm