फ़्रान्स में श्रम क़ानून में सुधार का व्यापक विरोध
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फ़्रान्स में यूरो कप के मुक़ाबले, श्रम क़ानून में सुधार के व्यापक विरोध में हो रही हड़तालों व प्रदर्शनों से प्रभावित हो रहे हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun १५, २०१६ १२:३७ Asia/Kolkata

फ़्रान्स में यूरो कप के मुक़ाबले, श्रम क़ानून में सुधार के व्यापक विरोध में हो रही हड़तालों व प्रदर्शनों से प्रभावित हो रहे हैं।

फ़्रान्स के राष्ट्रपति फ़्रान्सवा ओलांद सोच रहे थे कि यूरो कप शुरू होते ही श्रम क़ानून में सुधार का विरोध समाप्त हो जाएगा लेकिन एेसा नहीं हुआ बल्कि इसके विपरीत विरोध अधिक व्यापक हो गया। हड़ताल के चलते पूरे देश विशेष कर पेरिस की सड़कों पर कचरे का ढेर लग गया जिससे यूरो कप के दौरान फ़्रान्स की एक बुरी छवि संसार के सामने आई। पेरिस व कई अन्य शहरों में 14 जून को श्रम क़ानून में सुधार के विरोध में व्यापक हड़ताल के साथ प्रदर्शन हुए जो पिछले तीन महीनों के दौरान होने वाले सबसे बड़े प्रदर्शन थे। फ़्रान्स के श्रम संघ ने बताया है कि मंगलवार को हुए प्रदर्शन में देश के पचास शहरों में 13 लाख से अधिक लोग सड़कों पर आए।

 

फ़्रान्स में लगभग 25 प्रतिशत युवा बेरोज़गार हैं। मज़दूर यूनियनों व श्रम संघों का कहना है कि प्रस्तावित सुधारों से रोज़गार सुरक्षा समाप्त हो जाएगी और श्रमिकों तथा कर्मचारियों को काम से निकालने में कारख़ानों के मालिकों के हाथ खुल जाएंगे। रोज़गार सुरक्षा की समाप्ति, अधिक काम और कम वेतन, पिछले तीन महीनों में श्रम क़ानून में सुधार के व्यापक विरोध का मुख्य कारण है। तीन महीने से जारी विरोध से पता चलता है कि मज़दूर संघ किसी भी स्थिति में अपनी नीति से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। दूसरी ओर फ़्रान्सा ओलांद के लिए अपने बाक़ी बचे एक वर्ष के राष्ट्रपति काल में इन सुधारों को लागू करना ही देश को आर्थिक मंदी से निकालने का एकमात्र समझा जा रहा है। (HN)