बहरैन में मानवाधिकार के हनन पर राष्ट्र संघ चिंतित
संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव ने बहरैन में मानवाधिकार की स्थिति बेहतर बनाए जाने की मांग की है।
बान की मून ने रविवार को न्यूयार्क में बहरैन के विदेश मंत्री ख़ालिद बिन अहमद आले ख़लीफ़ा से मुलाक़ात में इस देश में मानवाधिकार की स्थिति बेहतर बनाए जाने के बारे में बात की। उनकी ओर से बहरैन में मानवाधिकार के की स्थिति पर चिंता प्रकट किया जाना, आले ख़लीफ़ा की तानाशाही सरकार की छाया में बहरैनी जनता की दयनीय दशा पर विश्व समुदाय की चिंता का प्रतीक है। नए आंकड़ों से पता चलता है कि आले ख़लीफ़ा की सरकार ने बहरैनी जनता पर अपने अत्याचारों और अपराधों में बहुत अधिक वृद्धि कर दी है जिसके चलते उसकी समर्थक पश्चिमी सरकारें भी विश्व समुदाय के दबाव में उसकी दमनकारी नीतियों की आलोचना करने पर मजबूर हो गई हैं।
इसी परिप्रेक्ष्य में यूरोपीय संसद ने गत जुलाई में राजनैतिक विरोधियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के संबंध में बहरैनी शासन के अपराधों की आलोचना की थी और राजनैतिक बंदियों को रिहा किए जाने की मांग की थी। यूरोपीय सांसदों ने एक प्रस्ताव पारित करके बहरैन सरकार से मांग की थी कि वह सभी नागरिकों की सुरक्षा को सुनिश्चित बनाए चाहे उनका संबंध किसी भी धार्मिक या राजनैतिक दल व गुट से हो। बहरैन में राजनैतिक बंदियों की संख्या में बढ़ोतरी और राजनैतिक कार्यकर्ताओं को आले ख़लीफ़ा जेलों में दी जाने वाली भयानक यातनाओं ने इस शासन की अत्याचारी प्रवृत्ति को और अधिक उजागर कर दिया है। बहरैन में मानवाधिकार का हनन इतना व्यापक है कि हर देखने वाले का ध्यान सहज ही उसकी ओर आकृष्ट हो जाता है और वह उसकी निंदा करता है। यह बात मानवाधिकार की विभिन्न संस्थाओं और संयुक्त राष्ट्र संघ की रिपोर्टों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। (HN)